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फ़रवरी, 18, 2026
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मुज़फ्फरपुर नगर निगम में हड़कंप: बिना एग्रीमेंट जारी हुआ वर्क ऑर्डर, करोड़ों के राजस्व पर मंडराया संकट!

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मुज़फ्फरपुर न्यूज़: नगर निगम में एक ऐसा फैसला हुआ है जिसने हर किसी को चौंका दिया है. कागज़ पर दस्तखत नहीं हुए, मगर काम का आदेश जारी हो गया! क्या यह सिर्फ एक चूक है या फिर ऑटो इंट्री शुल्क वसूली में किसी बड़े खेल का संकेत?

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जानकारी के अनुसार, मुज़फ्फरपुर नगर निगम में ऑटो इंट्री शुल्क की वसूली से जुड़ा एक वर्क ऑर्डर बिना किसी औपचारिक एग्रीमेंट के जारी कर दिया गया है. इस startling खुलासे ने नगर निगम के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. नियमानुसार, किसी भी कार्य का आदेश जारी करने से पहले संबंधित एजेंसी या व्यक्ति के साथ विधिवत करार (एग्रीमेंट) होना अनिवार्य होता है.

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नियमों की अनदेखी और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल

इस तरह की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को जन्म देती है. बिना एग्रीमेंट के काम शुरू होने से न केवल संबंधित पक्ष की जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है, बल्कि निगम को होने वाले राजस्व की वसूली और उसके सही उपयोग पर भी संदेह की तलवार लटक जाती है. यह स्थिति उन ठेकों और परियोजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है, जिनमें पारदर्शिता का दावा किया जाता है.

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यह भी पढ़ें:  Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में रंगे हाथों पकड़ा गया घूसखोर कृषि अधिकारी, ड्राइवर भी गिरफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना लिखित समझौते के किसी भी प्रकार के शुल्क की वसूली का आदेश जारी करना एक बड़ी प्रशासनिक चूक है. इससे भविष्य में कानूनी पेचीदगियां उत्पन्न हो सकती हैं और निगम को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. यह मामला दर्शाता है कि निगम के भीतर आंतरिक नियंत्रण प्रणाली कितनी कमजोर है, जहां महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है.

राजस्व वसूली में ‘बड़ा खेल’ की आशंका

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ऑटो इंट्री शुल्क वसूली में पहले भी अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं. ऐसे में बिना एग्रीमेंट के वर्क ऑर्डर जारी होने से इन आशंकाओं को और बल मिला है कि इस वसूली प्रक्रिया में कोई ‘बड़ा खेल’ चल रहा है. आशंका जताई जा रही है कि इससे निगम को मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से निजी जेबों में जा सकता है.

इस पूरे मामले पर फिलहाल नगर निगम के उच्चाधिकारियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है. हालांकि, इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है. उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर विस्तृत जांच शुरू होगी ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

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