

मुजफ्फरपुर न्यूज़: मुजफ्फरपुर नगर निगम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी मिली है कि लाखों के ऑटो इंट्री शुल्क वसूली से जुड़ा एक अहम वर्क ऑर्डर बिना किसी वैध एग्रीमेंट के ही जारी कर दिया गया। क्या यह महज एक प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे राजस्व को चूना लगाने का कोई बड़ा खेल चल रहा है?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में ऑटो इंट्री शुल्क की वसूली के लिए एक फर्म को वर्क ऑर्डर दिया गया है। हैरत की बात यह है कि इस वर्क ऑर्डर को जारी करने से पहले किसी भी तरह का एग्रीमेंट संबंधित फर्म के साथ नहीं किया गया। यह प्रक्रियागत त्रुटि सवालों के घेरे में है, क्योंकि नियमानुसार किसी भी सरकारी कार्य के लिए वर्क ऑर्डर जारी करने से पहले संबधित पक्ष के साथ वैध अनुबंध या एग्रीमेंट का होना अनिवार्य होता है।
नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितता का अंदेशा
बिना एग्रीमेंट के वर्क ऑर्डर जारी करना सीधे तौर पर सरकारी नियमों और पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह स्थिति न केवल वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को जन्म देती है, बल्कि भविष्य में राजस्व में सेंध लगने की संभावना को भी बढ़ा देती है। बिना किसी कानूनी बाध्यता के, वर्क ऑर्डर पर काम करने वाली फर्म की जवाबदेही तय करना भी मुश्किल हो जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो सकता है। ऑटो इंट्री शुल्क की वसूली निगम के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई या अनियमितता शहर के विकास कार्यों पर सीधा असर डाल सकती है।
क्या अधिकारियों की मिलीभगत है?
इस पूरे प्रकरण में नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह कैसे संभव हुआ कि इतनी बड़ी प्रक्रियागत चूक को नजरअंदाज कर दिया गया और बिना एग्रीमेंट के ही वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया? जांच से ही पता चल पाएगा कि यह गलती अनजाने में हुई है या इसके पीछे किसी की मिलीभगत है।
फिलहाल, इस मामले को लेकर निगम के गलियारों में हलचल तेज है। आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग भी इस पर नजर बनाए हुए है कि आखिर इस अनियमितता पर क्या कार्रवाई होती है और दोषियों को कब तक बेनकाब किया जाता है।


