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फ़रवरी, 18, 2026
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लीची के अपशिष्ट से बदलेगी पशुधन की तकदीर! बिहार में वैज्ञानिकों का बड़ा प्रयोग

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बिहार न्यूज़: क्या आपने कभी सोचा है कि गर्मियों में मीठी लीची का लुत्फ उठाने के बाद बचा हुआ कचरा भी किसी बड़े काम आ सकता है? अब बिहार के वैज्ञानिक इसी कचरे को एक नई पहचान देने में जुटे हैं, जो पशुधन के लिए पौष्टिक आहार का जरिया बनेगा। यह सिर्फ कचरा प्रबंधन नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है।

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एक रिपोर्ट के अनुसार, फलों के अपशिष्ट को पशु चारे में परिवर्तित करना पोषण सुरक्षा के लिए एक बेहद प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। यह न केवल पर्यावरण पर कचरे के बोझ को कम करेगा, बल्कि पशुओं के लिए सस्ते और पौष्टिक चारे की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा, जिससे उनकी सेहत और उत्पादकता में सुधार आएगा।

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इसी कड़ी में, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विकास दास ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने बताया कि लीची के अपशिष्ट से मवेशियों के लिए चारा तैयार करने हेतु गहन शोध कार्य प्रगति पर है। यह पहल लीची उत्पादक क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकती है, जहाँ लीची का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इसके साथ ही बड़ी मात्रा में अपशिष्ट भी उत्पन्न होता है।

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पशुधन के लिए पोषण सुरक्षा का नया मार्ग

यह वैज्ञानिक प्रयास केवल कचरे के निपटान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य पशुधन के लिए एक स्थायी और पोषक आहार विकल्प प्रदान करना है। लीची के अपशिष्ट में कुछ ऐसे पोषक तत्व हो सकते हैं, जिनका उपयोग करके एक संतुलित पशु आहार बनाया जा सके। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिल सकता है, क्योंकि किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध इस ‘कचरे’ का मूल्यवर्धन कर पाएंगे।

बिहार एक प्रमुख लीची उत्पादक राज्य है, और हर साल लीची के प्रसंस्करण और खपत के बाद भारी मात्रा में अपशिष्ट बचता है। इस अपशिष्ट का सही उपयोग न केवल पर्यावरणीय समस्याओं को कम करेगा, बल्कि पशुपालन उद्योग के लिए एक नया द्वार भी खोलेगा। यह शोध कृषि अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मॉडल भी प्रस्तुत कर सकता है।

वैज्ञानिकों का अनूठा प्रयोग और भविष्य की संभावनाएं

डॉ. विकास दास के नेतृत्व में चल रहा यह शोध लीची किसानों और पशुपालकों दोनों के लिए आशा की किरण लेकर आया है। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में अन्य फल अपशिष्टों को भी इसी तरह उपयोगी उत्पादों में बदलने की राह खुल सकती है। यह न केवल लीची उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाएगा, बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता भी रखता है, जिससे समग्र पोषण सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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