बेनीपुर,दरभंगा देशज टाइम्स: बिहार की महत्वाकांक्षी नल जल योजना बेनीपुर प्रखंड में दम तोड़ रही है। जिस योजना से हर घर पानी पहुंचने का सपना दिखाया गया था, वह आज खुद पानी-पानी होती दिख रही है। आखिर क्या है इस करोड़ों की योजना की जमीनी हकीकत, जिसकी शिकायत खुद विधायक को करनी पड़ रही है?
बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सात निश्चय योजना के तहत लगाई गई नल जल परियोजनाएं अपने सुचारु संचालन से पहले ही खस्ताहाल हो चुकी हैं। स्थानीय विधायक प्रोफेसर विनय कुमार चौधरी ने इस गंभीर समस्या के त्वरित समाधान की मांग को लेकर विभागीय सचिव पंकज पाल से मुलाकात की है। क्षेत्र में पेयजल संकट के कारण ग्रामीण परेशान हैं और योजना के क्रियान्वयन में हुई व्यापक अनियमितताओं पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या थी नल जल योजना की शुरुआत?
यह बात वर्ष 2018-19 की है, जब अनावृष्टि के कारण भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया था। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक पंचायत के हर वार्ड में ‘हर घर नल का जल’ पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। इस पहल के तहत, तत्कालीन विधायक के प्रयासों से बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र की सभी पंचायतों से पानी के नमूने एकत्र कर पटना स्थित छज्जूबाग प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए थे।
जांच के दौरान, कमला नदी के निकट स्थित सज्जनपुरा, महिनाम और पोहद्दी पंचायतों के चापाकलों से निकलने वाले पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा पाई गई थी, जिसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक बताया गया। इन चिन्हित पंचायतों के वार्डों में विशेष रूप से प्यूरीफायर युक्त और अधिक गहराई पर जल नल योजनाएं स्थापित की गईं, ताकि स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित किया जा सके।
अनियमितता की भेंट चढ़ी करोड़ों की योजना
हालांकि, प्रखंड क्षेत्र के अन्य वार्डों में लगभग 191 नल जल योजनाएं लगाने की जिम्मेदारी मुखियाओं को सौंपी गई, लेकिन इनके स्थापन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं। इन अनियमितताओं का परिणाम यह रहा कि लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक ‘हर घर नल का जल’ पहुंचाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका। बाद में, पंचायतों और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा लगाई गई कुल 234 नल जल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) को सौंप दी गई। दुर्भाग्यवश, विभाग इन योजनाओं के रखरखाव में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
पीएचईडी की लापरवाही और जमीनी हकीकत
बेनीपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रवीण कुमार ने बताया कि स्थल निरीक्षण के दौरान साठ प्रतिशत से अधिक नल जल योजनाओं में गंभीर त्रुटियां पाई गईं। इस संबंध में एक विस्तृत प्रतिवेदन जिला पदाधिकारी एवं लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को भेज दिया गया है। यह आंकड़ा योजना की जमीनी हकीकत और पीएचईडी की लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
यह कोई पहली बार नहीं है, जब विधायक प्रोफेसर विनय कुमार चौधरी ने इस मुद्दे को उठाया हो। गत वर्ष भी वे नल जल योजना में खराबी और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कराने को लेकर दरभंगा पीएचईडी कार्यालय पर धरना पर बैठे थे। उस समय विभाग ने आनन-फानन में कुछ योजनाओं को ठीक कर मामले को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अब एक बार फिर विधायक ने विभागीय सचिव से मिलकर क्षेत्र में पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। देखना यह होगा कि इस बार सरकार और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कितनी गंभीरता से ध्यान देते हैं।






