
दरभंगा न्यूज़: दरभंगा में आयोजित एक महत्वपूर्ण चिकित्सा सम्मेलन में डॉक्टरों के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डॉक्टरों को बेमानी बना देगा? जम्मू से आए एक विशेषज्ञ ने ऐसी भविष्यवाणी की है, जिसने चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है। चीन के एक अनोखे अस्पताल का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे AI ने मेडिकल साइंस में क्रांति ला दी है और क्यों इसे अपनाना अब मजबूरी बन गया है।
चिकित्सा में AI का बढ़ता प्रभुत्व: एक चेतावनी!
हाल ही में दरभंगा ऑब्सट्रेटिक्स एंड गाइनेकोलॉजिस्ट सोसायटी द्वारा एक स्थानीय होटल में आयोजित सीएमइ (कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव पर गहन चर्चा हुई। जम्मू से आए प्रख्यात चिकित्सक डॉक्टर अरुण अरोरा ने अपने सत्र में इस बात पर जोर दिया कि AI मेडिकल डायग्नोसिस और मैनेजमेंट को न केवल आसान, बल्कि अत्यधिक सटीक बना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान समय के चिकित्सक AI को अपनी प्रैक्टिस में नहीं अपनाते हैं, तो वे जल्द ही अप्रासंगिक हो जाएंगे।
डॉ. अरोरा ने चीन का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां दुनिया का पहला मानव रहित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट आधारित अस्पताल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस अस्पताल में सभी चिकित्सा सुविधाएं रोबोट और कंप्यूटर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा प्रदान की जाती हैं, और यह मौजूदा पारंपरिक अस्पतालों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर ढंग से कार्य कर रहा है। डॉ. उषा झा और डॉ. पूजा महासेठ ने डॉ. अरुण अरोरा के इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता की।
स्त्री रोग और बांझपन के इलाज में AI की भूमिका
अपने व्याख्यान में डॉ. अरोरा ने विस्तार से बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभिन्न प्रसूति एवं स्त्री रोगों की पहचान में कैसे सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि AI न केवल बांझपन और जटिल गर्भधारण के मामलों को सरल बना रहा है, बल्कि महिलाओं में भविष्य में होने वाली बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी करने में भी सक्षम है, वह भी दशकों पहले।
उनके अनुसार, 3D इफेक्ट सुपरइम्पोज्ड इमेजिंग के कारण AI सटीक सर्जरी और रोबोटिक सर्जरी को अत्यधिक सुविधाजनक बना देगा। इसी तरह, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी प्रक्रियाओं में, सही स्पर्म और भ्रूण के चुनाव में AI अभूतपूर्व सटीकता प्रदान करेगा। हालांकि, डॉ. अरोरा ने यह भी स्वीकार किया कि AI के इस व्यापक उपयोग से भविष्य में कई नैतिक प्रश्न भी उत्पन्न होंगे, जिन पर विचार करना आवश्यक होगा।
तकनीकी चुनौती और पश्चिमी देशों की बढ़त
इसी कार्यक्रम में बोलते हुए, डॉ. ओम प्रकाश ने AI के क्षेत्र में भारत के सामने मौजूद चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन सभी अत्याधुनिक कार्यों के लिए विशाल डेटा और कुशल इंजीनियरिंग उपकरणों की आवश्यकता होगी। डॉ. प्रकाश ने बताया कि इन क्षेत्रों में पश्चिमी देश वर्तमान में भारत से काफी आगे हैं और हमें इस अंतर को पाटने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है।
प्रीटर्म लेबर और प्रोजेस्टेरोन का महत्व
सीएमइ के एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में, डॉ. कुमुदनी झा ने प्रीटर्म लेबर (समय से पहले प्रसव पीड़ा) पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने इसके इलाज में योनि मार्ग से प्रोजेस्टेरोन के इस्तेमाल पर विशेष बल दिया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. अलका झा और डॉ. नूतन राय ने की।
समग्र कार्यक्रम का आयोजन डॉ. कुमुदिनी झा की अध्यक्षता में हुआ था, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भरत प्रसाद उपस्थित थे। इस ज्ञानवर्धक सीएमइ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे चिकित्सा विज्ञान में नवीनतम प्रवृत्तियों और प्रौद्योगिकियों पर गहन विचार-विमर्श का अवसर मिला।






