



कोसी और मिथिलांचल, जहां की समस्याओं का मूल कारण बाढ़ और विकास की उपेक्षा है, वहां की राजनीति में अपराध और धनबल (Money and Muscle Power) का बढ़ता हस्तक्षेप एक और गहरा संकट पैदा कर रहा है। दशकों से, इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक अनिश्चितता ने एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया है जहां बाहुबलियों का बोलबाला रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित करती है, बल्कि यह सुशासन (Good Governance) और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को भी खत्म करती है।
अपराधीकरण का उदय: गरीबी, असुरक्षा और ठेकेदारी
कोसी-मिथिलांचल में राजनीति के अपराधीकरण के उदय के पीछे कुछ विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक कारण हैं। बाढ़ और असुरक्षा का माहौल: हर साल आने वाली बाढ़ ने यहां के नागरिकों के जीवन में एक स्थायी असुरक्षा और अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस अनिश्चितता ने लोगों को ऐसे स्थानीय नेताओं की शरण लेने के लिए मजबूर किया जो उन्हें त्वरित ‘सुरक्षा’ या ‘न्याय’ का आश्वासन दे सकें, भले ही वे आपराधिक पृष्ठभूमि के हों। ठेकेदारी और भ्रष्टाचार: सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे (विशेषकर तटबंधों, सड़कों) के ठेकों में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है। अपराधी तत्वों ने राजनीति में प्रवेश कर इस ठेकेदारी सिंडिकेट पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। चुनाव जीतने के लिए धनबल का उपयोग होता है, और फिर सत्ता का उपयोग सार्वजनिक धन को लूटने के लिए किया जाता है। जातिगत ध्रुवीकरण: अपराधीकरण अक्सर जातिगत पहचान के साथ जुड़ जाता है। अपराधी नेता अपने आपराधिक कृत्यों को ‘जाति के सम्मान’ या ‘संरक्षक’ की आड़ में छिपाते हैं, जिससे उन्हें अपने समुदाय का राजनीतिक समर्थन मिलता रहता है।
शासन पर प्रभाव: विकास की विफलता
जब अपराधी तत्व नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल होते हैं, तो यह क्षेत्र के विकास पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव डालता है। कमजोर कानून-व्यवस्था: अपराधी नेता अपने प्रभाव का उपयोग पुलिस और प्रशासन पर दबाव डालने के लिए करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ती है। निष्पक्ष अधिकारी हाशिए पर चले जाते हैं। सार्वजनिक सेवाओं का क्षरण: अपराधी नेता सार्वजनिक धन और योजनाओं को व्यक्तिगत लाभ के लिए détourn करते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसे आवश्यक क्षेत्रों में सुधार नहीं हो पाता, जिससे पलायन और गरीबी का चक्र जारी रहता है। जनता का अविश्वास: जब नागरिक यह देखते हैं कि ईमानदार नेता चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग सत्ता में हैं, तो उनका लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास कमजोर होता है।
समाधान की राजनीतिक और न्यायिक आवश्यकता
कोसी-मिथिलांचल में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; इसके लिए न्यायिक, चुनावी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। चुनावी सुधार, त्वरित सुनवाई: आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन करना। राजनीतिक दलों पर ऐसे उम्मीदवारों को टिकट न देने के लिए कानूनी दबाव बनाना। वित्तीय पारदर्शिता: चुनाव में किए गए खर्च की पारदर्शिता बढ़ाना और काले धन के उपयोग को रोकने के लिए चुनाव आयोग की शक्तियों को मजबूत करना। संस्थागत मजबूती: कानून का शासन: भ्रष्टाचार पर नकेल कसने और ठेकेदारी में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासनिक सुधार करना। स्थानीय शासन को सशक्त करना: पंचायतों और नगर निकायों को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना ताकि वे ठेकेदारों और बाहुबलियों के दबाव से मुक्त होकर विकास कार्य कर सकें। जन-जागरण और नागरिक सक्रियता: मीडिया की भूमिका: स्थानीय मीडिया और नागरिक समाज संगठनों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को लगातार उजागर करने और मतदाताओं को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। विकल्प की राजनीति: युवाओं को सक्रिय और स्वच्छ राजनीति में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि वे आपराधिक तत्वों के सामने एक सशक्त और ईमानदार विकल्प प्रस्तुत कर सकें। निष्कर्ष: कोसी-मिथिलांचल में राजनीति का अपराधीकरण एक ऐसी बीमारी है जो लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रही है। जब तक राजनीतिक दल और मतदाता स्वयं अपराधी तत्वों को अस्वीकार नहीं करते, तब तक इस क्षेत्र का विकास एक सपना ही रहेगा। न्याय, शिक्षा और आर्थिक अवसर प्रदान करके ही इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक अनिश्चितता को कम किया जा सकता है, जो अंततः बाहुबलियों की राजनीतिक शक्ति को कमजोर करेगा। मिथिलांचल के राजनीतिक भाग्य को बदलने के लिए अब साहसी और ईमानदार राजनीतिक पहल की सख्त आवश्यकता है।





