

मुजफ्फरपुर न्यूज़: दिल्ली से उत्तर बिहार का सफर तय करने वाले यात्रियों के लिए मंगलवार का दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा। एक-दो नहीं, बल्कि दिल्ली से आने वाली कुल 11 ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से मुजफ्फरपुर पहुंचीं, जिससे हजारों मुसाफिरों की यात्रा परेशानी भरी बन गई। प्लेटफॉर्म पर इंतजार करते यात्रियों की भीड़ और रेलवे स्टेशनों पर पसरा असमंजस का माहौल, इस देरी की भयावहता को बयां कर रहा था।
घंटों इंतजार और यात्रियों की परेशानी
विलंब से चल रही इन ट्रेनों के कारण यात्रियों को कड़ाके की ठंड में घंटों प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ा। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ सफर कर रहे यात्रियों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों के आगे की यात्रा की योजनाएं भी इन देरी के कारण प्रभावित हुईं। स्टेशन पर पीने के पानी और खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता को लेकर भी यात्रियों ने शिकायतें कीं।
रेलवे का सामान्य परिचालन प्रभावित
यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है, अक्सर सर्दियों के मौसम में या तकनीकी दिक्कतों के चलते ट्रेनों का विलंब से चलना आम हो जाता है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों का घंटों देरी से पहुंचना निश्चित रूप से रेलवे के सामान्य परिचालन पर सवाल खड़े करता है। दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण रूट से आने वाली ट्रेनों में ऐसी लेटलतीफी हजारों यात्रियों के समय और सुविधा पर सीधा असर डालती है।
यात्रियों की आपबीती
कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें ट्रेनों के वास्तविक समय की जानकारी सही ढंग से नहीं मिल पा रही थी, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। कुछ यात्रियों का कहना था कि उन्हें महत्वपूर्ण बैठकें या अपॉइंटमेंट्स मिस करने पड़े, जबकि कुछ अपने गंतव्य तक पहुंचने के बाद आगे की कनेक्टिविटी के लिए चिंतित दिखे। इस अव्यवस्था ने यात्रियों के मन में रेलवे व्यवस्था के प्रति निराशा पैदा कर दी।
भविष्य की उम्मीदें
रेलवे प्रशासन को इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर रणनीति बनाने की आवश्यकता है, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो। समय पर सूचना और यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसी लेटलतीफी पर लगाम लगेगी और यात्रियों को सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।

