
आजकल बाजार में रुपये की चाल कुछ ऐसी है कि निवेशकों की सांसें अटकी हुई हैं। भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिसने सिर्फ अर्थशास्त्रियों को ही नहीं, बल्कि आम आदमी को भी चिंता में डाल दिया है। आखिर क्या हैं वे कारण जो भारतीय रुपये को इस कदर गोते लगाने पर मजबूर कर रहे हैं?
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक और ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, मंगलवार के शुरुआती कारोबार में यह पहली बार 90 का आंकड़ा पार कर गया। रुपया 10 पैसे की गिरावट के साथ 90.15 प्रति डॉलर पर खुला, जो निवेशकों के लिए एक चिंताजनक संकेत है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसलों का इंतजार है, साथ ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में किसी ठोस प्रगति का अभाव भी रुपये पर दबाव डाल रहा है।
डॉलर के मुकाबले क्यों कमजोर पड़ रहा रुपया?
रुपये की इस लगातार गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय कृषि उत्पादों, विशेष रूप से चावल पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इसके अलावा, कनाडा से आयात होने वाली खाद पर भी शुल्क लगाने की चेतावनी दी गई है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बयान देते हुए कहा था कि सस्ते आयात अमेरिकी किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं, जो उनकी सरकार के लिए चिंता का विषय है। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ रहा है।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का निर्णय: बाजार यूएस फेड के आगामी फैसलों पर करीब से नजर रख रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते में अपेक्षित प्रगति न होने से भी बाजार में निराशा का माहौल है।
- डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकी: भारतीय चावल और कनाडा की खाद पर नए टैरिफ लगाने की धमकी ने व्यापारिक तनाव को बढ़ा दिया है।
- डॉलर की बढ़ती मांग: सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ने से अन्य मुद्राओं पर दबाव बन रहा है।
शेयर बाजार पर भी दिखा गिरावट का असर
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को रुपया 90.15 पर खुला, जबकि सोमवार को यह 90.05 पर बंद हुआ था। इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0.04% गिरकर 99.04 पर आ गया। घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली, जहां सेंसेक्स 381.91 अंक टूटकर 84,720.78 पर खुला और बाद में कारोबार के दौरान 700 अंक तक गिर गया। निफ्टी-50 भी 139.55 अंक फिसलकर 25,821.00 पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड तेल का भाव भी 0.19% गिरकर 62.37 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी भारतीय बाजारों से लगातार निकासी कर रहे हैं, सोमवार को उन्होंने 655.59 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और RBI का रुख?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये पर दबाव बने रहने की आशंका है। मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और कमजोर घरेलू शेयर बाजार रुपये को दबाव में रखेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदें डॉलर को कुछ हद तक कमजोर कर सकती हैं, जिससे रुपये को निचले स्तर पर कुछ समर्थन मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप से भी रुपये को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है।
चौधरी के अनुसार, डॉलर-रुपया हाजिर दर 90.05 से 90.75 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है। वहीं, रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को स्पष्ट किया था कि केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये के लिए कोई निश्चित दायरा तय नहीं करता है, बल्कि घरेलू मुद्रा को बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप अपना वास्तविक स्तर खोजने की स्वतंत्रता देता है। शुक्रवार को आरबीआई द्वारा 6 महीने में पहली बार रेपो दर में कटौती के बाद रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.95 पर कारोबार समाप्त किया था, जो इस नई गिरावट से पहले की स्थिति थी।





