
मंगलवार का दिन भारतीय शेयर बाजार में चावल कंपनियों के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। सुबह-सुबह ही दिग्गज चावल कंपनियों के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। आखिर ऐसा क्या हुआ कि चंद घंटों में इन कंपनियों की अरबों की संपत्ति स्वाहा हो गई? जवाब अमेरिका से आया है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार, 9 दिसंबर का दिन चावल कंपनियों के निवेशकों के लिए एक बुरी खबर लेकर आया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन की शुरुआत में ही चावल सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए, कुछ तो 10 प्रतिशत तक टूट गए। इस अप्रत्याशित गिरावट ने निवेशकों को सकते में डाल दिया।
प्रमुख चावल कंपनियों जैसे केआरबीएल (KRBL), एलटी फूड्स (LT Foods) और जीआरएम (GRM) के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखी गई। कोहिनूर फूड्स (Kohinoor Foods) के शेयरों को भी जबरदस्त झटका लगा और वे भी लगभग 10 प्रतिशत तक फिसल गए। वहीं, चमन लाल सेतिया एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (Chaman Lal Setia Exports Limited) के शेयरों में भी 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर, अमेरिकी राष्ट्रपति के एक बयान ने भारतीय चावल कंपनियों के लिए लाल निशान पर कारोबार करने का दबाव बना दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति का ‘टैरिफ बम’
शेयरों में इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान है, जिसने कृषि उत्पाद आयातकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कृषि उत्पादों के आयात पर नए टैरिफ लगा सकते हैं।
ट्रंप ने विशेष रूप से भारत से आने वाले चावल और कनाडा से आयात होने वाले फर्टिलाइजर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सस्ते आयात अमेरिकी किसानों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं और उन्हें बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी किसानों की मदद के लिए 12 अरब डॉलर के पैकेज की घोषणा के ठीक बाद ये बातें कहीं।
ट्रंप ने आगे स्पष्ट किया कि अमेरिकी किसान चावल की गिरती कीमतों से परेशान हैं और उनकी सरकार ‘डंपिंग’ के मामलों पर कड़ी नजर रखेगी। उन्होंने भारत, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों से आयात होने वाले चावल को अमेरिकी किसानों की उपज की कीमतों को प्रभावित करने का मुख्य कारण बताया।
भारतीय निर्यातकों पर गहराता संकट
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान का सीधा और त्वरित असर भारतीय चावल निर्यात कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर चावल का निर्यात करती हैं, और यदि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में टैरिफ लगाए जाते हैं, तो उनके मुनाफे और बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी प्रशासन वाकई कृषि उत्पादों पर नए टैरिफ लागू करता है, तो इससे भारतीय चावल निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी। यह न केवल उनके मार्जिन को कम करेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनके विस्तार योजनाओं पर भी ब्रेक लगा सकता है।
फिलहाल, भारतीय चावल कंपनियों और निवेशकों की नजरें अमेरिकी सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। ट्रंप के बयान ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे आगे भी शेयर कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।






