



आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भारत एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है, जो AI डेवलपर्स और कंटेंट क्रिएटर्स दोनों के लिए अहम साबित होगा। DPIIT (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) की एक कमेटी ने AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के तरीके पर एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जिससे कॉपीराइट सामग्री के इस्तेमाल को लेकर नई व्यवस्था बन सकती है। जानिए क्या है यह प्रस्ताव और इसका भविष्य पर क्या असर होगा।
क्या है नया लाइसेंसिंग मॉडल?
DPIIT की एक विशेष समिति ने सिफारिश की है कि AI डेवलपर्स को अपने मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए वैध कॉपीराइटेड सामग्री का उपयोग करने हेतु अनिवार्य लाइसेंस लेना होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI तकनीक के विकास के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों के मालिकों यानी क्रिएटर्स के अधिकारों का भी सम्मान हो।
समिति के अनुसार, यह लाइसेंसिंग मॉडल न केवल कॉपीराइट सामग्री के वैध उपयोग को सुनिश्चित करेगा, बल्कि उन रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक भी प्रदान करेगा जिनकी सामग्री का उपयोग AI मॉडल्स को डेटा के रूप में सिखाने के लिए किया जाता है। यह एक ऐसा संतुलन स्थापित करने का प्रयास है, जिससे AI इनोवेशन को बढ़ावा मिले, लेकिन साथ ही बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा भी बनी रहे। अभी तक, AI डेवलपर्स द्वारा बड़े पैमाने पर डेटा के उपयोग को लेकर कई देशों में बहस चल रही है, और भारत का यह प्रस्ताव एक स्पष्ट नीतिगत रुख की ओर इशारा करता है।


