



दिल्ली से आ रही एक खबर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। अब AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों को किसी भी कॉपीराइटेड डेटा के इस्तेमाल से पहले सोचना होगा, क्योंकि सरकार एक ऐसा नियम लाने जा रही है जो क्रिएटर्स को उनके काम का उचित हक दिलाएगा। जानिए क्या है DPIIT की वो खास सिफारिश जिसने टेक जगत में हलचल मचा दी है।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते दायरे के बीच, बौद्धिक संपदा अधिकार और सामग्री रचनाकारों के हितों की रक्षा एक अहम मुद्दा बन गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की एक महत्वपूर्ण समिति ने AI डेवलपर्स के लिए एक अनिवार्य लाइसेंसिंग प्रणाली का सुझाव दिया है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग की जाने वाली कॉपीराइटेड सामग्री के लिए रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक मिले।
क्या है DPIIT की प्रमुख सिफारिश?
DPIIT द्वारा गठित एक समिति ने गहन विचार-विमर्श के बाद यह प्रस्ताव रखा है। समिति का मानना है कि AI सिस्टम को विकसित करते समय अक्सर बड़ी मात्रा में डेटा की आवश्यकता होती है, जिसमें टेक्स्ट, चित्र, ऑडियो और वीडियो जैसी कॉपीराइटेड सामग्री शामिल होती है। वर्तमान में, ऐसी सामग्री के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव है, जिससे रचनाकारों के अधिकारों के उल्लंघन का खतरा बना रहता है। नई सिफारिश के तहत, AI डेवलपर्स को कॉपीराइट धारकों से वैध लाइसेंस प्राप्त करना होगा।
यह प्रणाली न केवल रचनाकारों को उनके बौद्धिक संपदा के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि AI उद्योग में एक न्यायसंगत और पारदर्शी माहौल भी बनाएगी। समिति ने इस बात पर जोर दिया है कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और कुशल होना चाहिए ताकि नवाचार बाधित न हो, बल्कि उसे प्रोत्साहन मिले। इसका अर्थ है कि एक ऐसा मॉडल विकसित किया जाएगा जो दोनों पक्षों, यानी AI डेवलपर्स और सामग्री रचनाकारों, के लिए व्यावहारिक हो।
रचनाकारों के लिए क्यों है यह अहम?
डिजिटल युग में जहां सामग्री की नकल और उसका अनधिकृत उपयोग आम बात हो गई है, यह सिफारिश रचनाकारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। कलाकारों, लेखकों, संगीतकारों और अन्य सामग्री उत्पादकों को अक्सर यह चिंता रहती है कि उनके काम का उपयोग AI द्वारा बिना किसी क्रेडिट या मुआवजे के किया जा सकता है। अनिवार्य लाइसेंसिंग उन्हें न केवल उनके काम के लिए आर्थिक लाभ दिलाएगी, बल्कि उन्हें अपनी सामग्री पर अधिक नियंत्रण रखने का अधिकार भी देगी। यह कदम रचनात्मक उद्योगों को और मजबूत करेगा।
दूसरी ओर, AI डेवलपर्स के लिए यह एक नई चुनौती और अवसर दोनों है। उन्हें अपनी AI ट्रेनिंग प्रक्रियाओं में कॉपीराइट अनुपालन को प्राथमिकता देनी होगी। हालांकि यह प्रारंभिक चरण में कुछ अतिरिक्त लागत और प्रक्रियात्मक कदम जोड़ सकता है, लंबे समय में यह उद्योग के लिए कानूनी स्पष्टता प्रदान करेगा। इससे AI कंपनियों को भविष्य में कॉपीराइट उल्लंघनों से जुड़े मुकदमों से बचने में मदद मिलेगी और एक अधिक विश्वसनीय तथा स्थायी व्यावसायिक मॉडल विकसित होगा।
आगे की राह और संभावित चुनौतियाँ
इस सिफारिश को लागू करने में कई पहलुओं पर विचार करना होगा। इसमें लाइसेंसिंग शुल्क का निर्धारण, उल्लंघन के मामलों से निपटना और अंतरराष्ट्रीय कॉपीराइट कानूनों के साथ इसका सामंजस्य बिठाना शामिल है। सरकार को एक मजबूत नियामक ढांचा बनाना होगा जो सभी हितधारकों के हितों का संतुलन बनाए रखे। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि यह नीति AI के विकास और अपनाने की गति को धीमा न करे, बल्कि इसे नैतिक और जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ाए। इस पहल से भारत वैश्विक स्तर पर AI एथिक्स और बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण में एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर, DPIIT की यह सिफारिश भारत के AI और रचनात्मक उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यह एक ऐसे भविष्य की नींव रखेगी जहां प्रौद्योगिकी का विकास रचनात्मकता और न्यायसंगत व्यवहार के साथ तालमेल बिठाकर हो। अब देखना यह होगा कि सरकार इन सिफारिशों को किस रूप में अंतिम नीति का हिस्सा बनाती है और यह ज़मीन पर कैसे लागू होती हैं।


