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मार्च, 4, 2026
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आईजीआईएमएस पटना में दलाली रैकेट का भंडाफोड़: मरीजों से धोखाधड़ी करता दलाल रंगेहाथों गिरफ्तार

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पटना न्यूज़: राजधानी पटना के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एक बड़े दलाली नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। यह खबर उन लाखों मरीजों के लिए एक झटके के समान है, जो बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां आते हैं। पुलिस ने एक ऐसे शातिर दलाल को रंगेहाथों गिरफ्तार किया है, जो इमरजेंसी वार्ड में बेड दिलाने और निजी अस्पतालों में रेफर करने के नाम पर मरीजों से पैसे वसूल रहा था।

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यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में मौजूद खामियों और बिचौलियों के बढ़ते प्रभाव को उजागर करती है। सवाल यह है कि आखिर कैसे यह नेटवर्क अस्पताल के भीतर अपनी जड़ें जमा रहा था और कब से मरीजों को ठग रहा था?

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दलाली नेटवर्क का पर्दाफाश और गिरफ्तारी

पुलिस को लगातार आईजीआईएमएस में दलाली की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर एक गोपनीय ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान, इमरजेंसी वार्ड के पास से एक व्यक्ति को संदिग्ध गतिविधि करते हुए देखा गया। यह दलाल एक मरीज के परिजन से इमरजेंसी वार्ड में बेड उपलब्ध कराने के नाम पर कथित तौर पर मोटी रकम की मांग कर रहा था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस दलाल के तार किसी बड़े गिरोह या निजी अस्पतालों से जुड़े हैं, जो मरीजों को अपने यहां खींचने के लिए इन बिचौलियों का इस्तेमाल करते हैं।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह दलाली नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। अस्पताल में आते ही मरीजों या उनके परिजनों को ये दलाल अपने झांसे में लेते थे। उनके मुख्य लक्ष्य वे मरीज होते थे, जिन्हें इमरजेंसी में तुरंत बेड की जरूरत होती थी या जो अपने मरीज की गंभीर स्थिति को लेकर चिंतित रहते थे।

  • बेड दिलाने का लालच: इमरजेंसी वार्ड में बेड की कमी का फायदा उठाकर ये दलाल पैसे लेकर बेड दिलाने का आश्वासन देते थे।
  • निजी अस्पताल भेजने का दबाव: कई बार मरीजों को यह कहकर डराया जाता था कि अस्पताल में इलाज संभव नहीं है या पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, और फिर उन्हें महंगे निजी अस्पतालों में भेजने का दबाव बनाया जाता था। इसके लिए वे निजी अस्पतालों से कमीशन लेते थे।
  • फर्जी कागजात: कुछ मामलों में फर्जी कागजात या प्रक्रिया में तेजी लाने के नाम पर भी पैसे वसूले जाते थे।
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पुलिस की आगे की कार्रवाई

पुलिस ने गिरफ्तार दलाल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अस्पताल परिसर में सक्रिय पूरे दलाली नेटवर्क को बेनकाब करने में मदद मिलेगी। पुलिस उन अन्य सहयोगियों की भी तलाश कर रही है, जो इस गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं। अस्पताल प्रशासन से भी इस संबंध में सहयोग मांगा गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया है। उम्मीद है कि पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे गोरखधंधे पर लगाम लगाने में सहायक सिद्ध होगी।

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