
दिल्ली/रायपुर: भारत की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक है, जिसे क्रैक करने के लिए लाखों युवा अथक प्रयास करते हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में सफलता केवल पद और प्रतिष्ठा ही नहीं लाती, बल्कि देश की सेवा का अवसर भी प्रदान करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसे IAS अधिकारी भी हैं, जिनकी पहचान न सिर्फ उनके प्रशासनिक कौशल से है, बल्कि उन्हें देश के सबसे अमीर IAS अधिकारियों में भी शुमार किया जाता है? आज हम बात करेंगे चर्चित IAS अधिकारी अमित कटारिया की, जिनकी कहानी में पैसा, रुतबा और विवाद, तीनों का अनूठा संगम है.
कौन हैं देश के सबसे अमीर IAS?
देश के सबसे अमीर IAS अधिकारियों में से एक अमित कटारिया मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं. वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य सचिव के पद पर तैनात हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित कटारिया की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 8.90 करोड़ रुपये है, जो उन्हें भारत के सबसे धनी सिविल सेवकों की सूची में शामिल करती है.
कटारिया ने अपनी शुरुआती शिक्षा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई बेहद प्रतिष्ठित संस्थानों से की है. उन्होंने IIT दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवाओं में जाने का निर्णय लिया और वर्ष 2003 की UPSC परीक्षा में 18वां स्थान प्राप्त कर IAS बनने का अपना सपना पूरा किया. इंजीनियरिंग के दिनों में उन्हें कई बड़ी विदेशी कंपनियों से नौकरी के आकर्षक ऑफर मिले थे, लेकिन उन्होंने देश सेवा को प्राथमिकता देते हुए IAS बनने का रास्ता चुना.
एक रुपये की सैलरी और काम के प्रति जुनून
अमित कटारिया अपनी दौलत के साथ-साथ अपने काम के प्रति जुनून और समर्पण के लिए भी जाने जाते हैं. एक बार वे तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने सरकारी सैलरी के तौर पर सिर्फ एक रुपये लेने का फैसला किया था. उनका यह कदम सिविल सेवा में आने की चाह रखने वाले कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया. निजी जीवन की बात करें तो उनकी पत्नी पेशे से एक पायलट हैं. कटारिया के जीवन की यह कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि देश सेवा के जज्बे के साथ सिविल सर्विस में आना चाहते हैं.
जब प्रधानमंत्री से चश्मा लगाकर मिले IAS कटारिया
अमित कटारिया का नाम कई बार विवादों और सुर्खियों से जुड़ा रहा है. सबसे चर्चित घटनाओं में से एक तब सामने आई जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान काला चश्मा पहन रखा था. यह घटना साल 2015 की है, जब प्रधानमंत्री मई महीने में बस्तर के दौरे पर आए थे. उस समय अमित कटारिया बस्तर के कलेक्टर थे.
प्रधानमंत्री मोदी के जगदलपुर आगमन पर, तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ अमित कटारिया ने उनका स्वागत किया था. इस दौरान कटारिया ने नीली शर्ट और सनग्लासेज पहनकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना गया और उन्हें इस संबंध में एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, इस विवाद के बावजूद प्रशासन में उनके योगदान, पारदर्शिता और जन कल्याण को बढ़ावा देने के प्रयासों ने उन्हें पहचान और सम्मान दिलाया.
भाजपा नेता को दिखाया था ‘गेट आउट’ का रास्ता
अमित कटारिया से जुड़ा एक और विवाद साल 2011 का है, जब वे रायगढ़ के कलेक्टर थे. तत्कालीन भाजपा नेता रोशनलाल अग्रवाल गरीबों की ओर से गौरवपथ निर्माण के दौरान हो रहे अतिक्रमण को लेकर उनसे मिलने उनके दफ्तर पहुंचे थे. खबरों के अनुसार, इस दौरान कटारिया ने उन्हें अपने ऑफिस से ‘गेट आउट’ कहकर बाहर जाने को कह दिया था. यह घटना भी मीडिया में खूब उछली थी और कटारिया एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए थे.







