spot_img

Dilip Kumar Birthday Special: ले, अब तू भी कंजर हो गया…

spot_img
- Advertisement -

हा जाता है कि जब भी हिन्दी फिल्मों में अभिनय की बात होगी, तो यही कहा जायेगा कि पहले इसे दो भागों में बांटिए। पहला भाग दिलीप कुमार से पहले और दूसरा दिलीप कुमार के बाद…। जी हां, यही सच है। वे हमारी हिंदी फिल्मों की धुरी रहे हैं और हैं। अभिनेता, संवाद लेखक कादर खान ने बातचीत के बीच कभी कहा था, दिलीप साहब अभिनय की पाठशाला हैं। उनकी दस फिल्मों को रट कर कोई भी आदमी अभिनेता बन सकता है। इसी तरह महान सत्यजीत रे ने उन्हें मेथोडिक एक्टर कहा था। यानी सब कुछ नपा तुला…। यूसुफ खान यानी दिलीप कुमार का आज (11 दिसम्बर) जन्मदिन है। पढ़िए उनसे जुड़ी रोचक बातें एक किस्से का जरिए…

- Advertisement -

पिता के व्यवसाय में घाटा हो जाने के कारण यूसुफ खान को कॉलेज की पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी। उन्होंने पुणे के फौजी कैंटीन में मामूली नौकरी कर ली। चूंकि अंग्रेजी आती थी इसलिए वे ब्रिटिश सैनिकों में घुलमिल गए और उनके साथ फुटबॉल भी खेलने लगे। वे बहुत खुशनुमा दिन थे। वे कमा रहे थे और घर पैसे भी भेज रहे थे। यहीं उन्हें एक महाराष्ट्रीयन लड़की से प्रेम भी हुआ, लेकिन छह महीने बाद वे पुणे से मुंबई लौट आए। यह 1943 का साल था। मुंबई में यूसुफ खान अपने पिता के व्यवसाय को फिर से शुरू करने की सोच ही रहे थे कि अब्बा ने उन्हें राय-मशविरे के लिए पारिवारिक मित्र डॉक्टर मसानी के पास भेजा।

- Advertisement -

डॉ. मसानी को पता था कि यूसुफ की उर्दू अच्छी है और साहित्य में भी उनकी रु‍चि है, इसलिए उन्होंने उन्हें देविका रानी से मिलने की सलाह दी जो उन दिनों बॉम्बे टॉकिज का संचालन कर रही थीं। बॉम्बे टॉकिज उन दिनों प्रसिद्ध फिल्म निर्माण संस्था थी। डॉ. मसानी देविका रानी के भी पारिवारिक चिकित्सक थे। यूसुफ खान ने देविका रानी से भेंट की और लेखक के रूप में कंपनी में रखने का अनुरोध किया, लेकिन यूसुफ की शक्ल को देखकर उन्होंने उन्हें 1250 रुपए प्रतिमाह पर अभिनेता के रूप में नियुक्ति कर ली। देविका रानी की कम्पनी के अहम लोगों ने राय मशवरा कर यूसुफ को अपना फिल्मी नाम दिलीप कुमार रखने की सलाह दी, जिसे उन्होंने कुबूल कर ली।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  सावधान, घर से निकलने से पहले पढ़ें! बिहार के इन जिलों में वज्रपात और 50 KMPH तूफानी तेज आंधी का खतरा, तो कहीं 42°C की भीषण गर्मी, पढ़ें IMD का AlERT

उस जमाने में 1250 रुपए की रकम बहुत बड़ी होती थी। जब उन्होंने घर आकर यह बताया कि मुझे नौकरी मिल गयी है और मेरा वेतन 1250 रुपए तय हुआ है, तो घर के सदस्यों को उनकी बातों का यकीन नहीं हुआ। वो कहने लगे कि तुमने गलत सुन लिया है और तुम्हें 1250 रुपए साल भर के लिए मिलेंगे, क्योंकि तब राजकपूर का वेतन 175 रुपए प्रतिमाह हुआ करता था।

यह भी पढ़ें:  दरभंगा में मोहर्रम के बाद भड़की हिंसा! दुकानों-घरों में तोड़फोड़, 7 घायल; 6 गिरफ्तार, चौंकाने वाला खुलासा

यूसुफ खान यानी दिलीप कुमार को भी एक पल के लिए यही लगा कि कहीं उनके कानों ने कुछ गलत तो नहीं सुन लिया है? वे भी जानते थे कि राजकपूर 175 रुपए माहवार की तनख्वाह पर काम करते हैं।

संशय मिटाने के लिए दिलीप साहब ने डॉ. मसानी को फोन लगाया और मन की बात बताई। डॉ. मसानी ने देविका रानी से बात की, तो देविका रानी ने कहा, उन्हें बता दीजिए कि 1250 रुपए हर महीने मिलेंगे।

देविका रानी की सफाई के बाद दिलीप कुमार के भाई-बहनों ने खुशियां मनाई, क्योंकि अब उनके बुरे दिनों के खत्म होने की शुरुआत होने जा रही थी।

यूसुफ खान ने जब बॉम्बे टॉकिज में काम शुरू किया, तो अपने अब्बा या ग़में किसी को नहीं बताया कि मैं एक्टर बन गया हूँ। चूंकि सरवर खान फिल्मी लोगों के बारे में अच्‍छे विचार नहीं रखते थे। इसलिए जब यूसुफ खान का फिल्मी नाम दिलीप कुमार रखा गया, तो उन्होंने राहत महसूस की। उन्होंने घर में बताया कि मैं ग्लैक्सो कंपनी में काम करता हूँ। पिता ने तुरंत खुश होकर आदेश दिया कि नियमित रूप से ग्लैक्सो कंपनी के बिस्किट घर में आते रहना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध की वजह से खाद्यान्न का तब बड़ा टोटा था और इनका परिवार बड़ा था। छह भाई, पांच बहन और माता-पिता। कुल तेरह लोग, इससे दिलीप कुमार एक नई मुसीबत में फँस गए। ऐसे में कॉलेज का एक मित्र उनके काम आया, जो शहर में जहाँ भी ग्लैक्सो बिस्किट मिलता, इकठ्ठा करके दिलीप कुमार तक पहुँचा देता। वे स्टूडियो से घर लौटते समय डिब्बा कुछ इस तरह ले जाते, मानो माल सीधे फैक्ट्री से चला आ रहा है।

यह भी पढ़ें:  सुपरस्टार गौरव खन्ना की शादी टूटी! पत्नी अकांक्षा ने दुनिया से छिपाई थी ये बात, अब सामने आया सच

लेकिन यह क्या? एक दिन राजकपूर के दादा दीवान बशेशरनाथ ने भांडा फोड़ दिया, जिन्हें सरवर खान कंजर कहकर ताना मारते थे, क्योंकि उनका बेटा पृथ्वीराज नाटक और फिल्मों में काम करता था। एक दिन बशेशरनाथ फिल्म ज्वारभाटा (1944) का पोस्टर लेकर ही क्राफोर्ड मार्केट की दुकान पर पहुँच गए और उन्हें दिखाया। सरवर खान ने कहा, लगता तो यूसुफ जैसा ही है। दीवानजी ने फरमाया, लगना क्या है इसमें? यह यूसुफ ही है। अब तक तो मैं ही कंजर था, अब तू भी कंजर हो गया…।

दिलीप कुमार के पिता इस बात को लेकर उनसे कुछ वर्षों तक नाराज रहे। कुछ फिल्में करने के बाद जब दिलीप कुमार की फिल्म शहीद (1948) रिलीज हुई, तब बहुत कहने के बाद अब्बा हुज़ूर परिवार के साथ फिल्म देखने के लिए राज़ी हुए। फिल्म शहीद उन्हें पसंद आई। फिल्म का अंत देखकर उनकी आँखों में आँसू आ गए थे। घर आकर उन्होंने यूसुफ खान से कहा, आगे से अंत में मौत वाली फिल्में मत करना।

इत्तफाक देखिए कि दिलीप कुमार ने ‍फिल्मों में ‍जितने भी ऐसे रोल किये, जिनमें उनकी अंत में मृत्यु हो जाती है, सभी लोगों द्वारा खूब पसंद किए गए। ऐसे रोल उन्होंने जितनी फिल्मों में किये हैं, उतने किसी अन्य भारतीय अभिनेता ने नहीं किए। साथ ही दुखांत भूमिकाएं भी। वे हिन्दी सिनेमा के ट्रेजेडी-किंग इसीलिए कहलाये।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

यूपी राज्यसभा चुनाव: क्या 2027 का फैसला यहीं से होगा? BJP-SP की अग्निपरीक्षा! पढ़िए- ‘PDA’ फॉर्मूला और 10 सांसदों का ‘ सेमीफाइनल ‘

Uttar Pradesh Rajya Sabha: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। भाजपा और सपा दोनों ही अपनी रणनीति बनाने में जुटी#UPRajyaSabha,#UPElections2027,#BJPvsSP

Darbhanga News: जाले में बिजली संकट: दो दिनों से अंधेरे में डूबे गांव, भीषण गर्मी में सड़कों पर रात काट रहे लोग!

Jale Power Cut: जाले प्रखंड में पिछले दो दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे भीषण गर्मी में लोग सड़कों पर रात काटने को मजबूर हैं। सनहपुर पावर सब स्टेशन की बदहाल व्यवस्था और 33#JalePowerCut,#BiharElectricity,#HeatwaveCrisis

वेतन 27 लाख, खाते में 2.5 करोड़!कैसे हुआ Bihar DPO Corruption का पर्दाफाश? अब परिवार पर भी गिरेगी गाज!

Bihar DPO Corruption: सारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अजीत कुमार हरिजन के खिलाफ उप विकास आयुक्त की जांच में आय से 10 गुना अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है। 32 महीने के वेतन 27.5 लाख के#BiharDPO,#SaranNews,#Corruption

बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: अब रजिस्ट्री के लिए ये 3 नियम जानना बेहद जरूरी!

Bihar Land Registration: बिहार सरकार ने भूमि निबंधन प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं। अब जमीन के न्यूनतम सरकारी मूल्य (सर्किल रेट) संशोधित हो गए हैं और ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया#BiharLandRegistration,#BiharCircleRate,#PropertyRulesBihar