
Bihar Sugar Mill: जहाँ कभी गन्ने की मिठास से जीवन में रस घुलता था, अब वहाँ कबाड़ के ढेर पर टकराव का कड़वा स्वाद फैला है। गोपालगंज की चीनी मिल के स्क्रैप की नीलामी किसानों और प्रशासन के बीच तनाव का नया अध्याय लिख रही है।
बिहार चीनी मिल स्क्रैप नीलामी: क्यों भड़के किसान?
गोपालगंज में बंद पड़ी चीनी मिल के स्क्रैप की नीलामी का मामला अब गरमा गया है। लगभग 18.5 करोड़ रुपये में इस कबाड़ को बेचकर राशि बैंक में जमा करने की तैयारी है। लेकिन इस फैसले के खिलाफ किसानों का एक बड़ा वर्ग सड़कों पर उतर आया है। उन्हें डर है कि स्क्रैप बिक्री के बाद मिल की जमीन की भी नीलामी कर दी जाएगी, जिससे उनकी वर्षों पुरानी मांगें अनसुनी रह जाएंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बैंक की ओर से मिल पर मूलधन और ब्याज को मिलाकर सौ करोड़ रुपये से अधिक का दावा किया जा रहा है। ऐसे में स्क्रैप की नीलामी को बैंक अपने बकाया वसूली के लिए पहला कदम मान रहा है। हालांकि, किसानों का कहना है कि उन्होंने मिल को गन्ना दिया था, जिसके भुगतान का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बकाया है। उनका यह किसान आंदोलन इस बात की भी वकालत करता है कि मिल को फिर से चालू करने का प्रयास किया जाए।
किसानों ने प्रशासन से नीलामी के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह कदम एकतरफा और उनके हितों के खिलाफ है। यदि यह नीलामी रद्द नहीं होती, तो बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों की चेतावनी भी दी गई है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या है बैंक का दावा और किसानों की चिंता?
मिली जानकारी के अनुसार, चीनी मिल दशकों पहले बंद हो गई थी, जिससे इलाके के हजारों गन्ना किसान प्रभावित हुए थे। तब से, कई बार मिल को पुनर्जीवित करने के वादे किए गए, लेकिन वे कभी पूरे नहीं हुए। अब जब कबाड़ की नीलामी की बात सामने आई है, तो किसानों की रही-सही उम्मीदें भी टूटती दिख रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और किसानों के बीच इस गतिरोध का क्या हल निकलता है।




