
Patna Police News: पेट की आग बुझाने का जिम्मा अब उन हाथों में, जो खुद स्वावलंबन की मिशाल हैं। पटना न्यू पुलिस लाइन में ‘जीविका दीदी की रसोई’ ने पुलिसकर्मियों की सबसे बड़ी चिंता का समाधान कर दिया है। बिहार की राजधानी पटना के न्यू पुलिस लाइन में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए अब ड्यूटी के साथ भोजन की व्यवस्था एक समस्या नहीं रहेगी। ‘जीविका दीदी की रसोई’ पहल ने उनकी दिनचर्या को काफी आसान बना दिया है। पहले, पुलिसकर्मियों को अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद खाने का इंतजाम खुद करना पड़ता था, जो अक्सर मुश्किल भरा होता था। अब उन्हें पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन आसानी से उपलब्ध हो रहा है। यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एक भरोसा है कि उन्हें घर जैसा खाना मिलेगा।
यह पहल राज्य सरकार की ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत ‘जीविका’ कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सशक्त करना और उन्हें आजीविका के अवसर प्रदान करना है। पुलिस लाइन में शुरू हुआ यह मेगा सेंट्रल किचन आधुनिक सुविधाओं से लैस है और यहाँ पूरी तरह से स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है। इससे न केवल पुलिसकर्मियों को लाभ मिल रहा है, बल्कि जीविका दीदियों को भी सम्मानजनक रोजगार मिल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Patna Police News: क्या है ‘जीविका दीदी की रसोई’ की पूरी कहानी?
‘जीविका दीदी की रसोई’ का कॉन्सेप्ट बहुत सीधा और प्रभावी है। यह स्थानीय स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित एक केंद्रीय रसोई है, जो पुलिसकर्मियों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराती है। इस रसोई की शुरुआत से पहले पुलिस लाइन में जवानों को खाने को लेकर काफी परेशानी होती थी। कई बार उन्हें बाहर से महंगा और अस्वच्छ भोजन मंगवाना पड़ता था, जिससे उनके स्वास्थ्य और जेब दोनों पर असर पड़ता था। जीविका दीदियों द्वारा तैयार किया गया यह भोजन न केवल पौष्टिक है, बल्कि स्वच्छ भोजन की गारंटी भी देता है।
गुणवत्ता और स्वच्छता का पैमाना
इस रसोई में तैयार होने वाला हर भोजन गुणवत्ता और स्वच्छता के कड़े मानकों पर खरा उतरता है। जीविका दीदियां ताजी सब्जियों और अनाज का उपयोग करती हैं, जिससे पुलिसकर्मियों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन मिल सके। उनके लिए हर दिन एक नया मेन्यू तैयार किया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन शामिल होते हैं ताकि उन्हें एकरसता महसूस न हो। यह रसोई आधुनिक उपकरणों से लैस है, जो भोजन को हाइजीनिक तरीके से पकाने और परोसने में मदद करते हैं।
पुलिस महकमे में काम करने वाले जवानों के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। अच्छा भोजन उनके मनोबल को ऊंचा रखने में मदद करता है और उन्हें अपनी ड्यूटी पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है। जीविका दीदियों के हाथों से बने इस भोजन में घर जैसा प्यार और अपनापन भी शामिल है। यह केवल एक भोजन सेवा नहीं, बल्कि एक सामाजिक पहल है जो महिला सशक्तिकरण और पुलिस कल्याण को एक साथ साध रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पुलिसकर्मी बताते हैं कि पहले उन्हें कभी बाहर से खाना मंगवाना पड़ता था, तो कभी खुद ही बनाना पड़ता था, जिसमें काफी समय और ऊर्जा खर्च होती थी। अब उन्हें स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना बहुत ही किफायती दर पर मिल रहा है। यह सुविधा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस पहल से पुलिस लाइन के परिसर में एक सकारात्मक बदलाव आया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मॉडल अन्य पुलिस लाइनों और सरकारी संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जहां कर्मचारियों को भोजन की समस्या का सामना करना पड़ता है। ‘जीविका दीदी की रसोई’ सिर्फ पेट भरने का काम नहीं कर रही, बल्कि यह बिहार में महिला सशक्तीकरण की एक नई इबारत लिख रही है।




