
भागलपुर। SC/ST Act: न्याय की राह में कोई रोड़ा नहीं, खासकर जब बात समाज के वंचित तबके की हो। अत्याचार निवारण अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन ही एक सशक्त समाज की नींव रखता है।
भागलपुर में SC/ST Act की समीक्षा: पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम
SC/ST Act के प्रभावी क्रियान्वयन पर ज़ोर
भागलपुर, 15 दिसंबर 2025: जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की इस वर्ष की तीसरी महत्वपूर्ण बैठक समीक्षा भवन में संपन्न हुई। जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के त्वरित और अक्षरशः अनुपालन पर गहन मंथन किया गया। समिति के अध्यक्ष सह जिला पदाधिकारी ने अधिनियम के प्रावधानों को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू करने के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, इस अधिनियम के तहत आवंटित राशि से अब तक कुल 224 पीड़ित या उनके आश्रितों को मुआवजा राशि का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि प्रशासन पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कटिबद्ध है। जिले में अब तक इस अधिनियम के अंतर्गत कुल 187 मामले दर्ज किए गए हैं, और इन सभी मामलों में पीड़ित/आश्रितों को अधिनियम की धाराओं के अनुरूप अनुमान्य मुआवजा राशि का भुगतान जिला पदाधिकारी की स्वीकृति के उपरांत कर दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत कुल 46 आश्रितों को प्रतिमाह अनुमान्य पेंशन की राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। पिछले माह नवंबर में, दोनों पुलिस जिलों में इस अधिनियम से संबंधित माननीय न्यायालय में विचाराधीन चार मामलों में अंतिम फैसला सुनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप तीन अभियुक्तों को सजा दिलाई गई। यह न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता का परिचायक है।
बैठक में जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अधिनियम का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग न हो। उन्होंने जांच अधिकारियों को ऐसे मामलों की संवेदनशीलता से जांच सुनिश्चित करने का आदेश दिया। विशेष रूप से उन मामलों में, जहाँ भूमि-विवाद से संबंधित शिकायतें दर्ज हुई हों, पुलिस पदाधिकारियों को संवेदनशील होकर गहन जांच के बाद ही नियमानुसार अगली कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जिला पदाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि माननीय न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित करने हेतु लंबित कुल 319 मामलों में पुलिस पदाधिकारी त्वरित रूप से और संवेदनशीलता के साथ अनुसंधान पूर्ण करके आरोप पत्र दाखिल करना सुनिश्चित करेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि न्याय की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। इस दिशा में पीड़ित मुआवजा वितरण में भी तेजी देखने को मिली है।
न्याय प्रक्रिया में संवेदनशीलता और गति
इस बैठक ने जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को उजागर किया है कि वह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा और उन पर होने वाले अत्याचारों की रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। त्वरित कार्रवाई, समय पर मुआवजा और दुरुपयोग पर रोक लगाने जैसे निर्देश यह दर्शाते हैं कि प्रशासन इस अधिनियम को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने के लिए गंभीर है। यह पहल समाज में समानता और न्याय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






