
IIT Madras BTech
IIT Madras BTech छात्रों के लिए बड़ी राहत: अब BTech के बाद पाएं BSc की डिग्री!
IIT Madras BTech: भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक आईआईटी मद्रास ने अपने बीटेक छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह कदम छात्रों पर पढ़ाई के बोझ और मानसिक तनाव को कम करने की दिशा में उठाया गया है, जिससे उन्हें अपने करियर पथ को चुनने में अधिक लचीलापन मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब तक, आईआईटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए नियम काफी सख्त थे। अगर कोई छात्र चार साल में अपना बीटेक कोर्स पूरा नहीं कर पाता था, भले ही उसने दो या तीन साल पढ़ाई की हो, तो उसे कोई मान्य डिग्री नहीं मिलती थी। तकनीकी रूप से ऐसे छात्र को ड्रॉपआउट माना जाता था, जिससे उसके भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लग जाता था।
IIT Madras BTech छात्रों को अब मिलेगा BSc का विकल्प
आईआईटी मद्रास ने इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब यदि कोई छात्र किसी भी कारण से बीटेक की पढ़ाई चार साल में पूरी नहीं करना चाहता या नहीं कर पाता है, तो उसकी अब तक की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। संस्थान ने यह तय किया है कि जो छात्र बीटेक के तीन साल सफलतापूर्वक पूरे कर लेते हैं, वे चाहें तो बीएससी की मान्य डिग्री लेकर कोर्स से बाहर निकल सकते हैं। यह निर्णय छात्रों को अकादमिक दबाव से राहत देगा और उन्हें अपनी पसंद का करियर बनाने का अवसर प्रदान करेगा।
यह नया विकल्प 2024 में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए साल 2027 से लागू होगा, जब वे अपने तीन साल पूरे कर लेंगे। इसके अलावा, जो छात्र पहले से बीटेक में पढ़ रहे हैं और सीनियर हैं, उन्हें भी यह मौका दिया जाएगा। हालांकि, उनके लिए कुछ अलग शर्तें होंगी, जैसे कि उन्होंने पहले डिग्री पूरी करने का प्रयास किया हो, लेकिन किसी कारण से वे कोर्स पूरा नहीं कर पाए हों।
BSc डिग्री के लिए ज़रूरी शर्तें
यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को अधिक लचीलापन और बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करना है। हालांकि, इस नए फैसले का लाभ हर छात्र को नहीं मिलेगा। इसके लिए कुछ स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं, जिन्हें छात्रों को पूरा करना होगा। इन Eligibility Criteria को समझना छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- बीटेक कोर्स में कुल 400 क्रेडिट होते हैं और छात्र को इनमें से कम से कम 250 क्रेडिट पूरे करने होंगे।
- छात्र का अकादमिक रिकॉर्ड ठीक होना चाहिए, यानी उसने नियमित रूप से परीक्षाएं पास की हों।
- छात्र बार-बार फेल न हुआ हो और उसका सीजीपीए बहुत खराब न हो।
- इन Eligibility Criteria को पूरा न करने पर बीएससी डिग्री मिलने में दिक्कत आ सकती है।
आईआईटी मद्रास ने सिर्फ डिग्री का नया विकल्प ही नहीं दिया है, बल्कि पढ़ाई के पूरे सिस्टम को भी थोड़ा नरम किया है, ताकि छात्रों पर बेवजह का दबाव कम हो सके। पहले हर सेमेस्टर में छात्रों को एक तय संख्या में ज्यादा क्रेडिट पूरे करने पड़ते थे। अब संस्थान ने न्यूनतम क्रेडिट सीमा को करीब 10 प्रतिशत तक घटा दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पहले एक छात्र को एक सेमेस्टर में करीब 66 क्रेडिट पूरे करने पड़ते थे, जिसे बहुत भारी लोड माना जाता है। अब इसे घटाकर न्यूनतम 50 क्रेडिट कर दिया गया है, ताकि छात्र कम तनाव में पढ़ाई कर सकें और विषयों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
यह फैसला किन छात्रों के लिए है सबसे फायदेमंद?
आईआईटी मद्रास के डीन के अनुसार, यह योजना उन छात्रों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जो दबाव में या बिना रुचि के अपना कोर्स कर रहे हैं। अगर कोई छात्र एमबीए करना चाहता है, सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहता है, स्टार्टअप शुरू करना चाहता है या किसी दूसरी फील्ड में जाना चाहता है, तो वह सम्मान के साथ बीएससी डिग्री लेकर आगे बढ़ सकता है। यह कदम छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार करियर विकल्प चुनने की स्वतंत्रता देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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