



Kharmas 2025: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास का समय हिन्दू पंचांग में विशेष महत्व रखता है। यह वह अवधि है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है।
# खरमास 2025: जानें क्यों वर्जित हैं इस अवधि में मांगलिक कार्य
ज्योतिष शास्त्र में खरमास को एक ऐसी अवधि माना गया है, जब सूर्य देव का प्रभाव कुछ कमजोर हो जाता है। विशेषकर गुरु ग्रह पर इसका असर पड़ता है, जिससे सभी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यवसाय का आरंभ करने से बचना चाहिए। ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सिंह के अनुसार, इस समय की गई गलतियाँ भविष्य में प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए खरमास 2025 के दौरान सावधानी बरतनी अत्यंत आवश्यक है। यह अवधि आत्मचिंतन, साधना और दान-पुण्य के लिए उत्तम मानी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
## खरमास 2025 का ज्योतिषीय महत्व और सावधानियां
खरमास की अवधि मुख्य रूप से सूर्य के धनु राशि और मीन राशि में गोचर के कारण होती है। जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करते हैं, तो इन्हें ‘गुरु की राशियाँ’ कहा जाता है। चूंकि सूर्य देव इन राशियों में कमजोर स्थिति में होते हैं, इसलिए उन्हें अपने पूर्ण प्रभाव में नहीं माना जाता। गुरु ग्रह, जो शुभता और सौभाग्य का कारक है, भी इस दौरान कुछ अस्त हो जाता है, जिससे शुभ `मांगलिक कार्य` के लिए यह समय उपयुक्त नहीं रहता।
### किन कार्यों को नहीं करना चाहिए खरमास में?
* **विवाह संस्कार:** खरमास में विवाह करने से बचना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि की कमी आ सकती है।
* **गृह प्रवेश:** नए घर में प्रवेश या नींव रखने जैसे कार्य इस अवधि में अशुभ माने जाते हैं।
* **मुंडन और उपनयन संस्कार:** बच्चों के मुंडन या यज्ञोपवीत (जनेऊ) जैसे पवित्र संस्कार भी इस समय नहीं किए जाते।
* **नया व्यवसाय या महत्वपूर्ण खरीदारी:** नए व्यवसाय का आरंभ या बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह सफलता को प्रभावित कर सकता है।
* **भूमि-भवन की खरीद:** इस अवधि में संपत्ति खरीदना या बेचना भी टालना चाहिए।
* **देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा:** किसी नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा या बड़े धार्मिक अनुष्ठानों को खरमास में नहीं किया जाता है।
### खरमास में क्या करें?
हालांकि खरमास में `मांगलिक कार्य` वर्जित होते हैं, यह समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दौरान निम्न कार्य किए जा सकते हैं:
* **भगवान सूर्य की आराधना:** सूर्य देव को अर्घ्य देना और उनकी स्तुति करना लाभकारी होता है।
* **दान-पुण्य:** गरीब और जरूरतमंदों को दान देना, वस्त्र या अनाज का दान करना पुण्यकारक होता है।
* **तीर्थ यात्रा:** पवित्र नदियों में स्नान और तीर्थ स्थलों की यात्रा करना शुभ माना जाता है।
* **मंत्र जाप और ध्यान:** यह अवधि आध्यात्मिक साधना, मंत्र जाप और ध्यान के लिए उत्तम है। इससे मन को शांति मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* **भागवत कथा श्रवण:** इस दौरान भागवत कथा या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना या सुनना विशेष फलदायी होता है।
### निष्कर्ष और उपाय
खरमास एक ऐसा समय है जब प्रकृति और ग्रहों का संतुलन कुछ हद तक प्रभावित होता है। इसलिए इस अवधि का सम्मान करते हुए शुभ कार्यों से बचना और आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। धैर्य और संयम के साथ इस माह को व्यतीत करने से भविष्य में आने वाले शुभ समय का अधिक लाभ प्राप्त होता है। खरमास के नियमों का पालन करके हम अनिष्टों से बच सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।
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