
CM Mahila Rojgar Yojana: जहां सरकार महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं बिहार में एक ऐसी चूक सामने आई है जिसने इन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। जब सिस्टम की आंखें खुलीं, तब तक तीर कमान से निकल चुका था।
CM Mahila Rojgar Yojana: पुरुषों के खाते में पहुंचे योजना के पैसे, विभाग ने मांगे वापस तो मिला करारा जवाब!
CM Mahila Rojgar Yojana: आखिर कैसे हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी?
बिहार में CM Mahila Rojgar Yojana के तहत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, जिस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, उसी के अंतर्गत दो पुरुषों के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर हो गई। यह अपने आप में एक गंभीर सरकारी योजना में गड़बड़ी का मामला है, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। शुरुआत में हुई इस लापरवाही पर विभाग ने लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया।
जब विभाग को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसकी नींद खुली, तब इन ‘गलत’ लाभार्थियों को रकम वापस करने के लिए नोटिस भेजी गई। हालांकि, नोटिस मिलने के बाद दोनों पुरुषों ने साफ इनकार कर दिया है कि वे यह राशि वापस नहीं करेंगे। उनका जवाब है, “नहीं लौटाएंगे दस हजार रुपये।” इस प्रकरण ने न केवल योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कितनी ढिलाई बरती जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह घटना दर्शाती है कि लाभार्थियों की पहचान और बैंक खातों के सत्यापन में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है। बिना उचित जांच-पड़ताल के राशि का हस्तांतरण कैसे संभव हुआ, यह एक जांच का विषय है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अब क्या करेगा विभाग?
दो पुरुषों द्वारा राशि लौटाने से इनकार करने के बाद अब विभाग के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। क्या इन लाभार्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी या फिर इस ‘चूक’ को एक सबक मानकर भविष्य में ऐसी गलतियां न दोहराने का वादा किया जाएगा? सरकारी योजना में गड़बड़ी के ऐसे मामले जनता के पैसे के दुरुपयोग का सीधा उदाहरण हैं और इससे योजना के असली हकदारों तक लाभ पहुंचने में भी बाधा आती है। बिहार सरकार को इस मामले की गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसी घटनाएं योजनाओं की विश्वसनीयता को भी धूमिल करती हैं।







