
जमुई: जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर ने एक प्रधानाध्यापिका और उनके शिक्षक पति को अलग-अलग विद्यालयों में कार्यरत होने के बावजूद नियुक्ति से संबंधित मूल अभिलेख और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया है।
यह मामला तब गरमाया जब बरमसिया की प्रीति कुमारी ने शिक्षा विभाग के उपनिदेशक को एक शिकायत भेजी, जिसमें आरोप लगाया गया कि आदर्श मध्य विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कल्पना कुमारी अपने पति अशोक कुमार ढेंक को अमान्य संस्था से प्रशिक्षण दिलाने में मदद कर रही हैं और उनके माध्यम से अवैध रूप से वेतन की निकासी की जा रही है।
शिकायत के आधार पर, उपनिदेशक ने मामले की जांच के आदेश दिए, जिसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह कार्रवाई की। अशोक कुमार ढेंक, जो अनुग्रह मध्य विद्यालय, झाझा में कार्यरत हैं, से प्रशिक्षण से संबंधित मूल अभिलेख के साथ-साथ शिक्षक पद पर नियुक्ति की वैधता से संबंधित साक्ष्य तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
यह दूसरी बार है जब उनसे यह जानकारी तलब की गई है। इससे पहले सितंबर में भी मुंगेर के अनिल कुमार की शिकायत पर उन्हें प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र जमा करने का निर्देश दिया गया था। इस बार अनिल कुमार के साथ झाझा की प्रीति कुमारी ने भी शिकायत में कहा है कि अमान्य संस्था के प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर सरकारी राजस्व का दुरुपयोग किया जा रहा है।
वहीं, प्रधानाध्यापिका कल्पना कुमारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। शिक्षक अशोक कुमार ढेंक ने भी स्पष्ट किया है कि उन्हें संगत प्रोन्नति नियमावली के प्रावधानों के तहत मैट्रिक प्रशिक्षित वरीय वेतनमान स्वीकृत किया गया है, जिसके आधार पर वह प्रशिक्षित की श्रेणी में मान्य हैं।
उन्होंने कहा कि अमान्य संस्था से प्रशिक्षण का यहां कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले भी विभाग को वस्तु स्थिति से अवगत करा चुके हैं और एक बार फिर उच्च अधिकारियों को हकीकत से रूबरू कराएंगे। गौरतलब है कि अशोक ढेंक 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिक्षक नियुक्ति की वैधता पर सवाल
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रधानाध्यापिका कल्पना कुमारी से स्पष्टीकरण मांगा है कि उन पर लगे आरोपों की सत्यता कितनी है।
उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने शिक्षकों के साथ मिलकर अपने पति को नौकरी में बने रहने और वेतन निकासी में सहायता की। यह पूरा मामला शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया और प्रमाण-पत्रों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शिक्षा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहा है ताकि सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जांच में खुलासा, कार्रवाई तय
इस पूरे मामले की जांच अब शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी कर रहे हैं। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो शिक्षक पति और प्रधानाध्यापिका पत्नी दोनों पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है।
सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए प्रमाण-पत्रों की प्रामाणिकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


