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Makhana Cultivation: दरभंगा में अब ‘काले हीरे’ से बदलेगी किसानों की किस्मत, 5 साल का मास्टरप्लान तैयार

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Makhana Cultivation: जिस ‘काले हीरे’ ने मिथिलांचल को दुनिया भर में पहचान दिलाई, अब उसी की चमक से किसानों की तकदीर संवारने की एक नई कवायद शुरू हो गई है। दरभंगा के अलीनगर में एक स्वयंसेवी संस्था ने अगले 5 वर्षों के लिए एक ऐसी परियोजना का शंखनाद किया है, जिसका लक्ष्य मखाना उत्पादकों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लाना है।

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5 वर्षीय परियोजना से Makhana Cultivation को मिलेगा नया आयाम

शुक्रवार को अलीनगर प्रखंड सह अंचल कार्यालय के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्था ‘निर्देश’ ने अपनी ‘कोसी सहजीवन’ परियोजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्था के प्रतिनिधिमंडल के साथ बीडीओ ललित कुमार मिश्रा और प्रखंड कृषि पदाधिकारी राम कुमार मंडल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर संस्था के निदेशक विनोद कुमार ने कहा कि यह परियोजना अगले 5 वर्षों तक चलेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य मखाना की खेती को बढ़ावा देना और किसानों की उपज को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि इसके तहत किसानों को उन्नत मखाना बीज, खाद और आधुनिक खेती की तकनीक मुहैया कराकर उनकी मदद की जाएगी।

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संस्था के सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कोसी, जिसे कभी ‘बिहार का शोक’ कहा जाता था, अब उसे वरदान साबित करने की दिशा में संस्था काम करेगी। हमारा लक्ष्य पानी का सही उपयोग कर मखाना और मछली उत्पादन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सफलता के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित इस परियोजना से किसानों को निश्चित रूप से आर्थिक मजबूती मिलेगी।

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किसानों का दर्द: ‘प्रैक्टिकल इंजीनियर’ हैं, पर सरकारी मदद का अभाव

कार्यक्रम में मखाना उत्पादन का लंबा अनुभव रखने वाले सरपंच रामनाथ सहनी ने किसानों की पीड़ा को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यहां का सहनी समाज मखाना उत्पादन का पूर्ण रूप से प्रैक्टिकल इंजीनियर है, जो काले हीरे को सफेद हीरा बनाने का हुनर रखता है।” उन्होंने आगे कहा कि यहां की मिट्टी और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है, लेकिन सरकारी सहायता और उचित व्यवस्था की कमी के कारण हमारे समाज के लोग अपने बाल-बच्चों के साथ पूर्णिया से लेकर बंगाल तक मखाना फोड़ने के लिए पलायन करने को मजबूर हैं।

इस मुद्दे पर प्रखंड उद्यान पदाधिकारी प्रियांशु चौधरी ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश का 85% मखाना बिहार में होता है और उसका भी 85% दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों में उपजता है। लेकिन उचित प्रसंस्करण (processing) और मार्केटिंग की व्यवस्था न होने के कारण किसानों को उनकी मेहनत का सही लाभ नहीं मिल पाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह की योजनाओं से Makhana farming को काफी बल मिलेगा।

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सरकारी योजनाएं और अधिकारियों का आश्वासन

प्रियांशु चौधरी ने किसानों को सरकार की योजनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सरकार मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘मखाना विकास योजना’ चला रही है, जिसके अंतर्गत क्षेत्र विस्तार से लेकर तीन अलग-अलग चरणों में सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने किसानों को किसी भी सुझाव या जानकारी के लिए संपर्क करने का आश्वासन दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम में मुखिया विप्लव कुमार चौधरी, दयाशंकर झा मदन और कार्यक्रम प्रबंधक जाकिर हुसैन ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मंच संचालन संस्था के धर्मदेव शुक्ला ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राजीव रंजन झा ने प्रस्तुत किया।

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