



Artificial Intelligence: आज की डिजिटल दुनिया में, जहां तकनीक हर पल नई ऊंचाइयों को छू रही है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक ऐसा क्षेत्र है जो मानव जीवन को मौलिक रूप से बदलने की क्षमता रखता है। इस क्रांतिकारी बदलाव के पीछे कुछ दूरदर्शी दिमाग हैं, और उनमें से एक प्रमुख नाम है डॉ. फेई-फेई ली, जिन्हें AI की ‘गॉडमदर’ के रूप में जाना जाता है। उनकी कहानी सिर्फ तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि मानवता-केंद्रित AI के निर्माण की एक प्रेरणादायक गाथा है।
Artificial Intelligence की दुनिया की ‘गॉडमदर’ डॉ. फेई-फेई ली: टाइम मैग्जीन के आठ प्रभावशाली लोगों में शामिल
मानव-केंद्रित Artificial Intelligence की पैरोकार
डॉ. फेई-फेई ली को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक प्रतिष्ठित हस्ती माना जाता है। वह उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल हैं जिन्होंने AI तकनीक को सिर्फ शक्तिशाली बनाने पर ही नहीं, बल्कि इसे मानव-केंद्रित और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित रखने की बात को सबसे पहले और सबसे सशक्त तरीके से सामने रखा। उनकी यह दूरदृष्टि वर्तमान में AI के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हाल ही में, टाइम मैग्जीन ने उन्हें ‘पर्सन ऑफ द ईयर 2025’ के लिए चुने गए आठ सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक के रूप में नामित किया है, जो AI के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान का प्रमाण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
डॉ. ली स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन-सेंटर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (HAI) की सह-निदेशक हैं। उनकी रिसर्च इमेज रिकग्निशन, कंप्यूटर विजन और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित रही है, जिसने आधुनिक AI प्रणालियों की नींव रखी। विशेष रूप से, इमेजनेट (ImageNet) डेटाबेस बनाने में उनका काम AI के विकास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने डीप लर्निंग मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा उपलब्ध कराया।
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डॉ. ली का अतुलनीय योगदान
फेई-फेई ली का मानना है कि AI का अंतिम लक्ष्य मानव क्षमता को बढ़ाना और मानव अनुभव को समृद्ध करना होना चाहिए, न कि केवल स्वायत्त प्रणालियाँ बनाना। इसी दृष्टिकोण के साथ, उन्होंने AI तकनीक के सामाजिक प्रभावों, नैतिकता और सुरक्षा पर लगातार जोर दिया है। उनका यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि जैसे-जैसे AI तेजी से विकसित हो रहा है, हम मानवीय मूल्यों और ज़रूरतों को उसके केंद्र में रखें। इस विचार को बढ़ावा देने के लिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वह वैश्विक मंचों पर भी सक्रिय रूप से भाग लेती हैं और AI के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाओं में अपनी राय रखती हैं। डॉ. ली का काम न केवल AI के तकनीकी पहलुओं को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी मदद कर रहा है कि यह तकनीक समग्र मानवता के लिए एक वरदान साबित हो। उनका यह योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए AI के नैतिक और जिम्मेदार विकास की दिशा तय करता रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




