
Land Dispute: गांवों में अक्सर सुलगने वाली विवाद की आग पर जब प्रशासनिक सूझबूझ का पानी पड़ता है, तो दशकों पुरानी समस्याएं भी पल में शांत हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा शनिवार को जाले प्रखंड मुख्यालय में देखने को मिला, जहां एक नई पहल के तहत भूमि से जुड़े मामलों का निपटारा किया गया।
जाले में Land Dispute सुलझाने की यह नई पहल क्या है?
जाले प्रखंड के सूचना एवं प्रौद्योगिकी भवन स्थित आरओ कक्ष में शनिवार को पहली बार भूमि विवाद से संबंधित एक विशेष परामर्श सभा का आयोजन किया गया। यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो लंबे समय से अपने जमीनी मामलों को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। इस सभा का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों को एक साथ बिठाकर, उनके कागजातों की जांच कर आपसी सहमति से विवाद का हल निकालना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस सभा की अध्यक्षता राजस्व अधिकारी (आरओ) प्रवीण कुमार कर्ण ने की।
सभा के दौरान कुल चार मामले सुनवाई के लिए रखे गए। इनमें से दो मामले नगर परिषद क्षेत्र के थे, जबकि एक मामला कतरौल-बसंत पंचायत और एक अन्य मुरैठा पंचायत से जुड़ा हुआ था। यह दर्शाता है कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक है।
आपसी सहमति से हुआ विवादों का अंत
राजस्व अधिकारी प्रवीण कुमार कर्ण ने एक-एक करके सभी चारों मामलों की सुनवाई की। उन्होंने दोनों पक्षों की दलीलों को बड़े ध्यान से सुना और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए वैध दस्तावेजों का बारीकी से निरीक्षण किया। सबसे खास बात यह रही कि किसी भी पक्ष पर कोई फैसला थोपा नहीं गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रशासन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को आपसी समझौते के लिए प्रेरित किया। इसका परिणाम यह हुआ कि सभी चारों जमीनी विवाद मौके पर ही सुलझा लिए गए और मामलों को निष्पादित कर दिया गया। इस सफल आयोजन से लोगों में उम्मीद जगी है कि भविष्य में भी ऐसे कदम उठाए जाएंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। प्रशासन की इस पहल से न केवल लोगों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द भी बढ़ेगा।






