



ब्रह्मांड की अनमोल धरोहर, पंचांग, हमें प्रत्येक दिवस की ऊर्जा से परिचित कराता है। 21 दिसंबर 2025, रविवार का यह पावन दिन पौष शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के उपरांत द्वितीया तिथि के साथ प्रारंभ हो रहा है। यह पवित्र समय हमें अपने कार्यों के लिए सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करता है। पंचांग के माध्यम से हम न केवल शुभ और अशुभ समय का ज्ञान प्राप्त करते हैं, बल्कि विभिन्न योग, करण और नक्षत्र की स्थिति को भी समझते हैं, जो हमारे जीवन में संतुलन और सकारात्मकता लाने में सहायक होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह हमें अनचाही बाधाओं से बचने और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है।
आज का पंचांग: 21 दिसंबर 2025 को ग्रहों की दिव्य स्थिति और महत्व
प्रत्येक दिवस का अपना विशिष्ट महत्व होता है, जो ग्रहों की स्थितियों और खगोलीय गणनाओं से निर्धारित होता है। 21 दिसंबर 2025, रविवार को पौष मास, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के बाद द्वितीया तिथि का संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा मकर राशि में संचार करेंगे। इन ग्रहों की बदलती स्थितियां हमारे दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। पंचांग के पांच प्रमुख अंग – तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण – मिलकर हमें संपूर्ण ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह जानकारी हमें बताती है कि कौन सा समय किस कार्य के लिए अनुकूल है और किन समयों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए। यह ज्ञान हमें जीवन में सुख-शांति और सफलता की ओर अग्रसर करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पंचांग के मुख्य घटक और उनका महत्व
- तिथि: 21 दिसंबर 2025 को पौष शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा उपरांत द्वितीया तिथि रहेगी। तिथि का निर्धारण चंद्रमा की गति से होता है और यह किसी भी कार्य के शुभ-अशुभ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- वार: आज रविवार है। रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है और इस दिन सूर्यदेव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।
- नक्षत्र: प्रत्येक नक्षत्र का अपना विशिष्ट प्रभाव होता है। पंचांग में नक्षत्रों की स्थिति देखकर ही शुभ कार्यों का निर्धारण किया जाता है।
- योग: योग भी ग्रहों की स्थिति और नक्षत्रों के संयोग से बनते हैं, जो हमारे कार्यों की सफलता को प्रभावित करते हैं।
- करण: करण तिथि का आधा भाग होता है और यह भी शुभ-अशुभ समय के निर्धारण में सहायक होता है।
आज के दिन, सभी शुभ और अशुभ समयों को ध्यान में रखकर ही अपनी दिनचर्या को नियोजित करें। यह धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम अपने कार्यों को प्रकृति की लय के साथ संरेखित करें।
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उपाय और निष्कर्ष
आज रविवार के दिन सूर्यदेव की आराधना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। प्रातः काल स्नान के उपरांत सूर्यदेव को अर्घ्य दें और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। यह आपके जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता लाएगा। पंचांग का यह दैनिक ज्ञान हमें अपने जीवन को व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण बनाने में सहायता करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रहों की स्थितियों को समझकर हम चुनौतियों का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर सकते हैं और अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।




