



Winter Solstice 2025: ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों में से एक, शीतकालीन संक्रांति का पावन पर्व 21 दिसंबर 2025 को आ रहा है, जब प्रकृति अपने अद्भुत संतुलन का दर्शन कराती है और सूर्य अपनी न्यूनतम दक्षिणावर्ती यात्रा पूर्ण करता है। इस विशेष दिन पर दिन की अवधि सबसे कम और रात सबसे लंबी होती है, जो आध्यात्मिक चिंतन और नव ऊर्जा के संचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन न केवल एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है, जिसे प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि-मुनि पूजते आए हैं।
Winter Solstice 2025: जानें शीतकालीन संक्रांति का धार्मिक और खगोलीय महत्व
आज, 21 दिसंबर 2025 को, हम एक ऐसी दिव्य वेला के साक्षी बनेंगे जब सूर्यदेव अपनी दक्षिणायन यात्रा की चरम सीमा पर पहुँचते हैं और वर्ष का सबसे छोटा दिन तथा सबसे लंबी रात हमें प्राप्त होती है। यह अवसर हमें आत्मनिरीक्षण और प्रकृति के साथ एकाकार होने का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में इस दिन को ऊर्जा के पुनर्संतुलन और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक माना गया है।
Winter Solstice 2025: वर्ष का सबसे छोटा दिन क्यों?
सूर्य का दक्षिणायन यात्रा करते हुए मकर रेखा पर पहुँचने की यह घटना वैज्ञानिक रूप से ‘शीतकालीन संक्रांति’ या ‘उत्तरायण’ का आरंभ कहलाती है। इस दिन पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य से सबसे अधिक दूर होता है और सूर्य की किरणें सबसे तिरछी पड़ती हैं, जिसके कारण दिन की रोशनी कम और रात की अवधि अधिक होती है। यह एक अद्भुत खगोलीय घटना है जो ब्रह्मांड की निरंतर गतिशीलता और हमारे सौरमंडल की संरचना को दर्शाती है।
शीतकालीन संक्रांति का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। शीतकालीन संक्रांति के इस पवित्र दिन को विशेष रूप से देवी-देवताओं की उपासना और ध्यान के लिए शुभ माना जाता है। यह दिन अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का संकेत देता है, क्योंकि इसके बाद से धीरे-धीरे दिन बड़े होने लगते हैं। कई मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य करने और पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष फल प्राप्त होता है। यह पितरों को याद करने और उनके लिए तर्पण करने का भी एक उपयुक्त समय माना गया है।
आध्यात्मिक प्रभाव और उपाय
इस दिन का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह हमें बाहरी दुनिया से हटकर आंतरिक शांति की ओर मुड़ने का अवसर देता है। योग, ध्यान और मंत्रोच्चारण के लिए यह समय अत्यंत अनुकूल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शीतकालीन संक्रांति के दिन सूर्य नमस्कार करना, भगवान विष्णु और शिव की आराधना करना, तथा गरीब और जरूरतमंदों को वस्त्र और अन्न दान करना अत्यंत लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि इन कार्यों से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
शीतकालीन संक्रांति 2025 हमें यह सिखाती है कि प्रकृति के हर परिवर्तन में एक गहरा संदेश छिपा है। यह हमें चुनौतियों का सामना करने, अंधकार के बाद प्रकाश की उम्मीद रखने और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। तो आइए, इस पावन दिवस पर हम सभी प्रकृति के इस अद्भुत चक्र का सम्मान करें और आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हों।
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