Bihar Doctors: बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लिए मरीज पहुंचते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें सिर्फ खाली कुर्सियां और मायूसी मिलती है। ऐसा लगता है, व्यवस्था खुद बीमार है, जिसका कोई डॉक्टर नहीं।
बिहार डॉक्टर्स: सरकारी नौकरियों से क्यों कतरा रहे हैं डॉक्टर?
Bihar Doctors: नियुक्ति के बाद भी क्यों खाली रह जाती हैं सीटें?
देश के सबसे बड़े राज्यों में शुमार बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक ओर जहां सरकार बेहतर स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। आलम यह है कि महीनों लंबी और जटिल प्रक्रिया के बाद जब डॉक्टरों को सरकारी नौकरी का प्रस्ताव मिलता है, तो वे ज्वाइन करने से कतरा रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को दीमक की तरह चाट रही है, जिससे गरीब और आम जनता को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का न होना सिर्फ सीटों का खाली रहना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उन लाखों मरीजों के जीवन से जुड़ा सवाल है, जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता। गांव-देहात से लेकर शहरों तक, हर जगह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक में मेडिकल vacancies Bihar की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। जब डॉक्टर ही नहीं होंगे, तो अस्पताल की इमारतें और उपकरण भला किस काम आएंगे? यह स्थिति बिहार के सरकारी अस्पतालों को इलाज से पहले खुद मरीज बनाती दिख रही है।
राज्य सरकार द्वारा डॉक्टरों की भर्ती के लिए कई प्रयास किए जाते हैं, विज्ञापन निकाले जाते हैं, परीक्षाएं होती हैं और महीनों की लंबी कागजी कार्रवाई के बाद नियुक्ति पत्र जारी किए जाते हैं। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में डॉक्टर इन ऑफर्स को ठुकरा देते हैं या ज्वाइन करने के बाद कुछ ही समय में छोड़ देते हैं। इस वजह से न केवल सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा सुधारने की हर कोशिश अधूरी रह जाती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराता संकट
इस गंभीर समस्या का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहने वाले लोग गुणवत्तापूर्ण इलाज से वंचित रह जाते हैं। कई बार तो गंभीर बीमारियों में इलाज के अभाव में मरीजों की जान तक चली जाती है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर क्यों डॉक्टर सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनने से गुरेज कर रहे हैं? क्या मौजूदा कार्यप्रणाली, सुविधाओं की कमी या अन्य कोई बड़ा कारण है, जो उन्हें सरकारी सेवा से विमुख कर रहा है? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस चुनौती का समाधान खोजना राज्य सरकार के लिए बेहद आवश्यक है, ताकि बिहार की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें और कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में दम न तोड़े। इस विषय पर गहन चिंतन और त्वरित कार्रवाई की सख्त जरूरत है।





