Free Trade Agreement: भारत और इजरायल के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ेगा। यह समझौता सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि दोनों मित्र राष्ट्रों के लिए व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के द्वार खोलने का एक बड़ा अवसर है।
भारत-इजरायल Free Trade Agreement: एक नए आर्थिक युग की शुरुआत
जनवरी में इजरायल से अधिकारियों की एक टीम भारत आने वाली है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित Free Trade Agreement (FTA) पर आधिकारिक बातचीत को अंतिम रूप देना है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस ऐतिहासिक समझौते से न केवल आर्थिक गति मिलेगी, बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत होगी।
Free Trade Agreement: व्यापार और निवेश के नए आयाम
भारत और इजरायल ने 20 नवंबर को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका लक्ष्य अगले दस सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दस गुना बढ़ाना है। दोनों देश पहले ही एक द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जो निवेश के प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। इस FTA से दोनों की एक-दूसरे के बाजार में पहुंच बढ़ेगी, पूंजी प्रवाह में वृद्धि होगी और व्यापार व निवेश के लिए नए अवसर खुलेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
एशिया में चीन के बाद इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। परंपरागत रूप से, दोनों देशों के बीच हीरे, पेट्रोलियम उत्पाद और रसायनों का द्विपक्षीय कारोबार मुख्य रहा है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में इसमें विविधता आई है और अब इसमें मेडिकल डिवाइस से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी तक शामिल हैं। भारत से इजरायल को निर्यात किए जाने वाले प्रमुख उत्पादों में मोती और कीमती पत्थर, रसायन और खनिज, कृषि उत्पाद, कपड़ा, मूल धातुएं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्लास्टिक शामिल हैं। वहीं, इजरायल से भारत आने वाले सामानों में पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण और मशीनरी प्रमुख हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में, भारत और इजरायल के बीच कुल 3.62 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें भारत ने 2.14 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया और 1.48 बिलियन डॉलर का आयात किया। ये आंकड़े दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों को दर्शाते हैं।
भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ व्यापारिक संभावनाएं
इजरायल के साथ-साथ, भारत रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत के दूसरे दौर की शुरुआत फरवरी में करेगा। FTA पर बातचीत का पहला दौर नवंबर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।
भारत-EAEU FTA के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर 20 अगस्त 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत 18 महीने की एक विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसका उद्देश्य भारत में छोटे कारोबारियों, किसानों और मछुआरों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशना है। EAEU में रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे पांच देश शामिल हैं। इनमें से रूस भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत और EAEU के बीच इस FTA का लक्ष्य मौजूदा 70 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय कारोबार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस तरह के समझौते भारत के वैश्विक व्यापारिक पदचिह्न को मजबूत करने और विविध बाजारों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये व्यापारिक समझौते भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘वेस्ट’ नीतियों का एक अभिन्न अंग हैं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार इन समझौतों के माध्यम से घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और निर्यात को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।




