Mokama News: जेल की सलाखें कभी-कभी सियासत की नई इबारत लिख जाती हैं। दीवारें भले ही कैद करें, पर इरादों की उड़ान को रोक नहीं पातीं। बिहार के मोकामा की राजनीति में एक बार फिर ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है, जहां एक विधायक का पत्र प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा गया है।
मोकामा न्यूज़: जेल से विधायक अनंत सिंह का ‘विद्रोही’ पत्र, मोकामा चौक पर मचा सियासी घमासान!
मोकामा न्यूज़: अनंत सिंह का जेल से प्रशासनिक फैसले पर सवाल
बिहार की राजनीति में बाहुबली विधायक के नाम से जाने जाने वाले मोकामा के पूर्व विधायक अनंत कुमार सिंह, जो फिलहाल बेऊर जेल में बंद हैं, उनके एक पत्र ने इलाके की सियासत में भूचाल ला दिया है। यह पत्र किसी चुनावी रणनीति या व्यक्तिगत बयानबाजी को लेकर नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले पर सवाल उठाता है। अनंत सिंह ने जेल से ही एक पत्र (Anant Singh Letter) लिखकर मोकामा चौक के सौंदर्यीकरण और उसके आसपास के अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि इस अभियान के तहत गलत तरीके से लोगों को परेशान किया जा रहा है और कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सूत्रों की मानें तो यह पत्र स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जेल में बंद एक विधायक द्वारा सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि उनकी पकड़ और प्रभाव अभी भी मोकामा की राजनीति में बरकरार है। पत्र में उन्होंने मोकामा चौक के नामकरण और उसकी ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ न करने की भी अपील की है, जिससे स्थानीय लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस मुद्दे पर जनता भी दो धड़ों में बंटती दिख रही है, कुछ लोग विधायक के समर्थन में हैं तो कुछ प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
मोकामा चौक का विवाद और सियासी मायने
अनंत सिंह का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब मोकामा में आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो रही हैं। उनके इस कदम को सियासी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे वे अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत कर सकें। स्थानीय लोगों का कहना है कि मोकामा चौक दशकों से इलाके का केंद्र रहा है और इसके विकास से संबंधित कोई भी फैसला यहां की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए। प्रशासन अब इस पत्र के बाद दबाव में है और संभवतः उन्हें इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जेल से जारी इस Anant Singh Letter ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राज्य स्तर पर भी ध्यान खींचा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या विधायक के आरोपों की जांच की जाती है। इस मुद्दे का समाधान मोकामा की राजनीतिक दिशा और जनता के भरोसे पर गहरा प्रभाव डालेगा। यह साफ है कि मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह की गैर-मौजूदगी भी उनके प्रभाव को कम नहीं कर पाई है। उनका एक पत्र भी सियासी हलकों में हलचल मचाने के लिए काफी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





