Stock Market: नए साल के पहले ही दिन भारतीय शेयर बाजार में तंबाकू कंपनियों के शेयरों में भूचाल आ गया। केंद्र सरकार के एक बड़े फैसले ने निवेशकों को चौंका दिया और इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए, जिसने पूरे बाजार में एक हलचल मचा दी।
# सिगरेट पर बढ़ा टैक्स: स्टॉक मार्केट में तंबाकू शेयरों में भारी गिरावट
नए साल की शुरुआत निवेशकों के लिए तंबाकू सेक्टर में अच्छी नहीं रही। पहले कारोबारी दिन ही प्रमुख तंबाकू कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। ITC के शेयर करीब 8.2% टूटकर ₹370 के स्तर पर आ गए, जबकि Godfrey Phillips के स्टॉक में लगभग 16% की भारी गिरावट देखी गई। यह गिरावट केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट पर उत्पाद शुल्क (excise duty) बढ़ाने के निर्णय के बाद आई है।
## तंबाकू शेयरों पर स्टॉक मार्केट की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि की घोषणा की है। यह नया नियम 1 फरवरी से लागू होगा। सिगरेट की लंबाई के अनुसार, अब ₹2,050 से ₹8,500 प्रति हजार स्टिक्स तक उत्पाद शुल्क लगेगा। यह वृद्धि मौजूदा 28% GST और अन्य सेस के ऊपर होगी, जिससे तंबाकू उत्पादों पर कुल कर का बोझ काफी बढ़ जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे एक सिगरेट की कीमत में ₹2-3 की बढ़ोतरी संभव है। इसी दौरान, ITC के करीब 4 करोड़ शेयर एक ब्लॉक डील में ₹400 के औसत मूल्य पर बेचे गए, जिसकी कुल वैल्यू ₹1,614.5 करोड़ रही। सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने और तथाकथित ‘सिन गुड्स’ (sin goods) की खपत को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि इस कदम से तंबाकू कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।
## उत्पाद शुल्क वृद्धि का प्रभाव और आगे की राह
उत्पाद शुल्क बढ़ने के साथ, तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर प्रभावी GST दर लगभग 40% हो जाएगी। इससे इन उत्पादों की खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ सकता है। सरकार के इस कदम से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में भी इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, कंपनियों के लिए यह एक चुनौती भरा समय होगा क्योंकि उन्हें बढ़े हुए कर बोझ को समायोजित करना होगा और साथ ही अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने की कोशिश भी करनी होगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। विश्लेषकों का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव के दीर्घकालिक प्रभाव तंबाकू उद्योग की विकास गति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।





