Indore water contamination: जीवन की धारा जब ज़हर बन जाए, तब तंत्र की नींद खुलती है। इंदौर में दूषित पानी के संकट ने शहर को हिला दिया है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब सरकारी मशीनरी पूरी ताकत से जुट गई है।
Indore water contamination: इंदौर में दूषित पानी का तांडव, सीएम के निर्देश पर हुई हाई-लेवल बैठक, संकटमोचन बनी सरकार!
Indore water contamination: जल संकट पर उच्चस्तरीय समीक्षा
इंदौर जल प्रदूषण का संकट गहराया: मुख्यमंत्री मोहन यादव के सीधे निर्देश पर, इंदौर में दूषित जल की समस्या को लेकर गुरुवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थिति का आकलन करना और राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से समन्वित करना था। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कम से कम चार लोगों की जान चली गई और 140 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे, शहरी विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभागीय आयुक्त सुदाम खाडे, जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि जल आपूर्ति लाइन से संबंधित निविदा मुद्दों और काम में बाधा बन रही छोटी-मोटी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और उनका समाधान निकाला गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भागीरथपुरा क्षेत्र की निविदा प्रक्रिया शुक्रवार तक स्वीकृत हो जाएगी और तत्काल प्रभाव से काम शुरू कर दिया जाएगा। शहर में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी पानी से संबंधित समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों की कमी और मौजूदा कार्यभार को कम करने के लिए दो-तीन अतिरिक्त अधिकारियों को इंदौर में तैनात किया जाएगा, ताकि कामकाज सुचारु रूप से चलता रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंत्री विजयवर्गीय ने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया, प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव सहायता एवं समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “मैं अभी भागीरथपुरा से लौटा हूं और वहां से लगातार मरीज आ रहे हैं। पिछले दो दिनों में लगभग 200 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुल मिलाकर 1400 लोग इस संक्रमण से प्रभावित हुए, जिनमें से 200 को अस्पताल में गहन उपचार की आवश्यकता पड़ी और शेष को प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया गया। राहत की बात यह है कि किसी भी मरीज की हालत गंभीर नहीं है और आईसीयू वार्ड में भर्ती मरीज भी अब खतरे से बाहर हैं। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रभावितों को समय पर और सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मिले।” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
राहत और निगरानी के सख्त निर्देश
विजयवर्गीय ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रत्येक अस्पताल में, जहां इस बीमारी से प्रभावित मरीजों का इलाज चल रहा है, वहां एक राजस्व अधिकारी और एक स्वास्थ्य अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, लोगों की सहायता और जानकारी के लिए एक हेल्प डेस्क भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने इस घटना को इंदौर के लिए “बेहद गंभीर” करार दिया और कहा कि राज्य सरकार, नगर निगम की टीम और जिला प्रशासन इस समस्या की जड़ तक पहुंचने और इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इस दौरान, मंत्री विजयवर्गीय ने 70 वर्षीय नंदलाल पाल के घर जाकर उनके परिवारजनों से मुलाकात की, जिनकी कथित तौर पर दूषित पानी पीने से मृत्यु हो गई थी, और उन्हें समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





