Caller ID: भारत में अब आपके फोन पर आने वाली अनचाही कॉल्स की पहचान को लेकर एक बड़ा बदलाव आने वाला है। नेटवर्क स्तर पर कॉलर आईडी में हो रहे इस परिवर्तन से स्पैम और धोखाधड़ी वाले कॉल्स पर लगाम लगाने की तैयारी है। यह नई व्यवस्था कैसे काम करेगी और क्या यह Truecaller जैसी लोकप्रिय ऐप्स को पीछे छोड़ पाएगी, आइए विस्तार से जानते हैं।
नेटवर्क स्तर पर कॉलर आईडी का वार: क्या बदल पाएगा अनचाही कॉल्स का खेल?
नेटवर्क आधारित कॉलर आईडी (CNAP) और Truecaller: अंतर समझना जरूरी
CNAP, यानी कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन, एक ऐसी तकनीक है जो टेलीकॉम ऑपरेटर्स को कॉलर का नाम नेटवर्क स्तर पर ही दिखाने की सुविधा देती है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि अब तक यह जानकारी केवल ऐप-आधारित सेवाओं या आपके फोनबुक से मिलती थी। सरकार इस पहल के जरिए उन अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉल्स पर अंकुश लगाना चाहती है, जो हर उपभोक्ता के लिए परेशानी का सबब बनती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
CNAP सीधे टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़कर काम करता है, जहां कॉलर का रजिस्टर्ड नाम उसके नंबर के साथ दिखाई देता है। Truecaller इसके विपरीत, एक क्राउडसोर्स्ड डेटाबेस पर निर्भर करता है, यानी उपयोगकर्ताओं द्वारा दर्ज की गई जानकारी और उनके फोनबुक्स से प्राप्त डेटा को एकत्रित करता है। CNAP की खासियत यह है कि यह सीधे सर्विस प्रोवाइडर से नाम लेता है, जिससे जानकारी की सटीकता बढ़ने की उम्मीद है।
शुरुआती तौर पर, CNAP को महाराष्ट्र, गुजरात और कुछ अन्य राज्यों में लाइव किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्पैम कॉल्स, फ्रॉड और अनचाही मार्केटिंग कॉल्स से उपभोक्ताओं को बचाना है। यह सीधे नेटवर्क स्तर पर काम करेगा, जिससे किसी थर्ड-पार्टी ऐप की जरूरत नहीं पड़ेगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम टेलीमार्केटिंग उद्योग के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। अनचाही कॉल्स की पहचान होने से लोग उन्हें उठाना बंद कर देंगे, जिससे इन कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। यह उपभोक्ताओं को अनचाहे विघ्नों से मुक्ति दिलाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हालांकि, CNAP की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि टेलीकॉम ऑपरेटर्स इसे कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं और क्या वे अपने डेटाबेस को लगातार अपडेट रखते हैं। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि यह नई प्रणाली उनके फोन पर आने वाली स्पैम कॉल्स की संख्या को कम करने में मदद करेगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की भूमिका और आगे की राह
TRAI ने इस पहल को बढ़ावा दिया है ताकि कॉल करने वाले की पहचान को पारदर्शी बनाया जा सके। इसका लक्ष्य एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है जहां उपभोक्ता को यह पता हो कि कौन कॉल कर रहा है, भले ही वह नंबर उनकी संपर्क सूची में सहेजा न गया हो। यह डिजिटल संचार में विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कुल मिलाकर, CNAP भारत में कॉलर आईडी के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जहां Truecaller जैसे ऐप्स अपने यूएसपी के साथ बने रहेंगे, वहीं CNAP का नेटवर्क-स्तर का दृष्टिकोण स्पैम और धोखाधड़ी के खिलाफ एक मजबूत हथियार साबित हो सकता है।



