Hindu Nav Varsh 2026: भारतीय संस्कृति में प्रत्येक नए वर्ष का आगमन केवल कैलेंडर बदलने की तिथि नहीं, अपितु प्रकृति के नवजीवन और आध्यात्मिक चेतना के उद्दीपन का महापर्व है। यह वह पावन वेला है जब सृष्टि नव ऊर्जा से स्पंदित होती है और जन-मानस में भी नई आशाओं का संचार होता है।
आ रहा है शुभ Hindu Nav Varsh 2026: जानें चैत्र मास से नववर्ष की शुरुआत और इसका महत्व
भारतीय ज्योतिष और सनातन धर्म परंपरा में नववर्ष की गणना चंद्र मास और सूर्य की गति के आधार पर की जाती है। जहां पश्चिमी देश 1 जनवरी को नववर्ष का जश्न मनाते हैं, वहीं भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष का शुभारंभ होता है। यह दिन न केवल एक नया कैलेंडर वर्ष लाता है बल्कि यह धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से भी परिपूर्ण है। इस समय प्रकृति भी नया श्रृंगार करती है, पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फूलों की सुगंध वातावरण को और भी पावन बना देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कब है Hindu Nav Varsh 2026 की सही तिथि?
वर्ष 2026 में, हिंदू नववर्ष का पावन पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाया जाएगा। यह तिथि प्रायः मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ती है और चैत्र नवरात्रि के साथ ही इसका शुभारंभ होता है। यह दिन कई शुभ संयोगों और खगोलीय घटनाओं से भरा होता है, जो इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। विक्रम संवत 2083 का आरंभ इसी दिन से होगा, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। यह तिथि सनातन धर्म के अनुसार नवसृजन और नए संकल्पों का प्रतीक है।
हिंदू नववर्ष का महत्व और विक्रम संवत 2083
हिंदू नववर्ष को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे गुड़ी पड़वा, उगादि, चेटीचंड, नवरेह आदि। यह तिथि भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना के दिन के रूप में भी मानी जाती है। इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की थी और अपने नाम से विक्रम संवत का आरंभ किया था। यह संवत आज भी भारतीय पंचांगों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस दिन घरों को तोरणों और रंगोलियों से सजाया जाता है, नए वस्त्र धारण किए जाते हैं और देवी-देवताओं का पूजन कर मंगल कामना की जाती है। इस दिन से चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। यह एक ऐसा समय है जब हर ओर सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शुभ परंपराएं और उपाय
हिंदू नववर्ष के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना, स्वच्छ वस्त्र धारण करना और घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण बांधना शुभ माना जाता है। इस दिन नीम की पत्तियां और मिश्री का सेवन करने की भी परंपरा है, जिसे नववर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, अपने इष्ट देवी-देवताओं का पूजन कर नए वर्ष की खुशहाली के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने, अपने मूल्यों को समझने और एक नई सकारात्मक शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी मिलकर एक समृद्ध और शांतिपूर्ण भविष्य की कामना करें।






