बेंगलुरु आतंकी साजिश: आतंक के काले बादल जब किसी शहर पर मंडराते हैं, तो उनकी जड़ें पाताल तक गहरी होती हैं। बेंगलुरु में लश्कर-ए-तैयबा की एक ऐसी ही खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक मनोचिकित्सक समेत तीन लोगों के खिलाफ दूसरा आरोपपत्र दाखिल किया है।
बेंगलुरु आतंकी साजिश: NIA ने दाखिल किया दूसरा आरोपपत्र, मनोचिकित्सक समेत तीन नामजद
बेंगलुरु आतंकी साजिश: जांच की नई दिशा और अहम खुलासे
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े 2023 के बेंगलुरु आतंकी साजिश मामले में एक मनोचिकित्सक सहित तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। यह मामला बेंगलुरु में आतंकी गतिविधियों की योजना और भारत की संप्रभुता को चुनौती देने से संबंधित है। अधिकारियों ने शुक्रवार को इस बड़े खुलासे की जानकारी दी।
गुरुवार को बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में दाखिल अपने दूसरे पूरक आरोपपत्र में, एनआईए ने अनीस फातिमा, चान पाशा ए और नागराज एस को विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत नामजद किया है। इन धाराओं में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और कर्नाटक जेल अधिनियम शामिल हैं। यह गंभीर एनआईए आरोपपत्र इस बात का प्रमाण है कि एजेंसियां देश की सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्क हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मूल रूप से बेंगलुरु शहर पुलिस द्वारा जुलाई 2023 में दर्ज किया गया यह मामला, आदतन अपराधियों से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण बरामद होने से जुड़ा था। ये अपराधी बेंगलुरु में आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे और उनका इरादा देश की सुरक्षा को कमजोर करना था। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा के हितों को बढ़ावा देना था।
यह एक व्यापक साजिश का हिस्सा था जिसका मकसद 2008 के बेंगलुरु सिलसिलेवार बम धमाका मामलों में एक विचाराधीन कैदी टी. नसीर को जेल से अदालत ले जाते समय भगाने में सहायता करना था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, इसे स्थानीय पुलिस से अक्टूबर 2023 में एनआईए को सौंपा गया था। एनआईए ने इससे पहले फरार जुनैद अहमद सहित नौ अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे।
षड्यंत्र का ताना-बाना और आरोपी की भूमिका
आरोपपत्र में नामजद तीन आरोपियों में से एक अनीस फातिमा की पहचान फरार जुनैद अहमद की मां के रूप में हुई है। जांच से पता चला है कि अनीस फातिमा ने बेंगलुरु के केंद्रीय कारागार, परप्पना अग्रहारा में बंद टी. नसीर को रसद संबंधी सहायता और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह सहयोग उसकी आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा। इन खुलासों से स्पष्ट है कि आतंक के नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




