PUC और फिटनेस सर्टिफिकेट: अब वाहनों के प्रदूषण और फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाना पहले से कहीं अधिक सख्त होने जा रहा है, क्योंकि सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है, जिसका सीधा असर हर वाहन मालिक पर पड़ेगा।
वाहनों के लिए PUC और फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के नियम होंगे कड़े
PUC और फिटनेस सर्टिफिकेट: क्या बदल रहा है?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) मोटर वाहन नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करने की तैयारी में है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) और फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत अधिक कठोर हो जाएगी। इन बदलावों के तहत, वाहनों को अब अनिवार्य रूप से अधिकृत टेस्ट सेंटरों पर ले जाना होगा, जहाँ उनकी पूरी जांच की जाएगी। यह कदम देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और सड़क सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में अक्सर वाहन बिना उचित जांच के ही सर्टिफिकेट प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन नए नियमों का उद्देश्य इस खामी को दूर करना और वाहनों की वास्तविक स्थिति का आकलन सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय का मानना है कि इससे न केवल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, बल्कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। यह प्रक्रिया वाहन मालिकों के लिए थोड़ी जटिल हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह पर्यावरण और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रदूषण और सुरक्षा: क्यों जरूरी हैं नए नियम?
भारत में वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, खासकर बड़े शहरों में। खराब रखरखाव वाले और पुराने वाहन निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते, जिससे हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। इसके साथ ही, कई ऐसे वाहन भी सड़कों पर चल रहे हैं, जिनकी फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इन गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए ही मंत्रालय ने मौजूदा नियमों में बदलाव का फैसला किया है। नए नियम यह सुनिश्चित करेंगे कि केवल वही वाहन सड़कों पर चलें जो पर्यावरण मानकों का पालन करते हैं और तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट हैं। यह पहल न केवल शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार करेगी बल्कि सड़कों को सभी के लिए सुरक्षित भी बनाएगी। इन नए नियमों के प्रभावी होने के बाद, वाहनों की नियमित और कठोर जांच एक आवश्यकता बन जाएगी।
नए प्रावधानों के तहत, वाहनों को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस टेस्ट सेंटरों पर ले जाना होगा। ये सेंटर स्वचालित तरीके से वाहनों के उत्सर्जन स्तर, ब्रेक, लाइट्स, टायर और अन्य सुरक्षा संबंधी पहलुओं की जांच करेंगे। इस प्रणाली से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन बदलावों से एक मजबूत और विश्वसनीय प्रणाली स्थापित हो, जो पर्यावरण और सड़क सुरक्षा दोनों के प्रति जवाबदेह हो। लेटेस्ट कार और बाइक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें
भारत में, विभिन्न प्रकार के वाहनों के लिए PUC सर्टिफिकेट प्राप्त करने की लागत आमतौर पर ₹60 से ₹150 तक होती है, जो वाहन के प्रकार (पेट्रोल, डीजल, सीएनजी) और स्थान पर निर्भर करती है। फिटनेस सर्टिफिकेट की लागत भी वाहन के प्रकार और उम्र के अनुसार भिन्न होती है, लेकिन यह सैकड़ों में हो सकती है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंत्रालय जल्द ही इन नियमों को अधिसूचित कर सकता है, जिसके बाद सभी वाहन मालिकों को इन नए प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। यह कदम भविष्य में प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित सड़कों की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।




