Bhagalpur Land Scam: कागजों पर जिंदा एक मृत महिला, सरकारी गलियारों में तैरती भ्रष्टाचार की गंध और सिस्टम पर सवाल उठाती एक चौंकाने वाली कहानी भागलपुर से सामने आई है। यह एक ऐसा मामला है जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
Bhagalpur Land Scam: कैसे रची गई फर्जीवाड़े की साजिश?
भागलपुर जिले से सामने आए इस सनसनीखेज खुलासे ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। यह Bhagalpur Land Scam सिर्फ एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में गहरे पैठे भ्रष्टाचार का प्रतीक है। यहां वर्ष 2015 में जिस महिला की मृत्यु हो चुकी थी, उसे वर्ष 2024 में काग़ज़ों पर न सिर्फ़ जीवित दिखाया गया, बल्कि उसकी बेशकीमती ज़मीन का नामांतरण भी करवा लिया गया। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और आपराधिक मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मामला भागलपुर सदर अंचल क्षेत्र से जुड़ा है, जहां मृतका बेबी शेख उर्फ रुखसार निशा की मृत्यु 6 अप्रैल 2015 को ही हो चुकी थी। नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र भी इसकी पुष्टि करता है। इन स्पष्ट साक्ष्यों के बावजूद, भू-माफियाओं और भ्रष्ट तत्वों ने मिलकर एक सुनियोजित ढंग से भूमि नामांतरण धोखाधड़ी को अंजाम दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि नामांतरण प्रक्रिया एक फर्जी शपथपत्र के आधार पर पूरी की गई, जिसने जांच अधिकारियों को भी स्तब्ध कर दिया है।
मृतका के पति स्वर्गीय मो. शर्फुद्दीन का भी निधन हो चुका था। नियमानुसार, पति-पत्नी दोनों के न रहने पर, उनकी संपत्ति का नामांतरण वैध उत्तराधिकारियों के नाम पर होना चाहिए था। लेकिन यहां सभी नियमों को ताक पर रखकर, किसी और व्यक्ति के नाम से झूठा शपथपत्र तैयार किया गया और जमीन को अवैध रूप से अपने नाम कराने का कुप्रयास किया गया। इस तरह की भूमि नामांतरण धोखाधड़ी अक्सर बड़े रैकेट का हिस्सा होती हैं, जहां जमीन के कागजातों में हेरफेर कर करोड़ों की संपत्ति हड़पी जाती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इस पूरे प्रकरण का पर्दाफाश तब हुआ जब जमीन से जुड़ा एक विवाद सामने आया और मामले की गहनता से जांच शुरू हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रारंभिक जांच में ही सरकारी दस्तावेजों के साथ यह बड़ा खिलवाड़ सामने आ गया, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
जांच के घेरे में अधिकारी और संगठित गिरोह
मामले की गंभीरता को देखते हुए, सदर एसडीएम विकास कुमार ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जगदीशपुर अंचल और संबंधित थाना प्रभारी को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में राजस्व कर्मियों या अन्य सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियां इस बात की आशंका भी जता रही हैं कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूखंडों की खरीद-फरोख्त करता है। जनता ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि जिले में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए सभी नामांतरण मामलों की फिर से गहन जांच कराई जाए, ताकि ऐसे अन्य फर्जी मामलों का भी खुलासा हो सके और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






