Darbhanga Jail News: न्याय की चौखट तक पहुंचने से पहले ही जब किसी की किस्मत सलाखों के पीछे दम तोड़ने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। दरभंगा मंडल कारा से ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां न्यायिक अभिरक्षा में बंद कैदियों को वकालतनामा पर समय रहते अंगूठे का निशान नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण जमानतीय मामलों में भी उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ रहा है।
दरभंगा जेल न्यूज़: वकालतनामा में देरी, आखिर क्यों उलझ रहे कैदी?
मंडल कारा दरभंगा में विचाराधीन बंदियों का वकालतनामा (Power of Attorney) पर ससमय अंगूठे का निशान या हस्ताक्षर नहीं मिलने से उनके जमानत आवेदन न्यायालय में दाखिल नहीं हो पा रहे हैं। यह समस्या खासकर उन कैदियों को ज़्यादा परेशान कर रही है, जो मामूली या जमानतीय धाराओं में जेल में बंद हैं। इस लापरवाही के कारण उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और उन्हें बिना वजह सलाखों के पीछे रातें गुजारनी पड़ रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बहेड़ी थानाक्षेत्र के नौडेगा निवासी रूबी देवी ने इस संबंध में जिला दंडाधिकारी (DM) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के सचिव को एक लिखित आवेदन दिया है। रूबी देवी ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि उनके पति प्रमोद महतो को एक जमानतीय मामले में 26 दिसंबर, 2025 से न्यायिक हिरासत में रखा गया है। उनके जमानत के लिए न्यायालय में आवेदन दाखिल करने हेतु वकालतनामा पर आरोपी के अंगूठे का निशान लेने के लिए उन्होंने 31 दिसंबर को जेल प्रशासन को वकालतनामा जमा कराया था।
हालांकि, 2 जनवरी तक भी जेल कर्मचारियों ने यह वकालतनामा उपलब्ध नहीं कराया। रूबी देवी ने आरोप लगाया है कि जेल कर्मचारियों की इस घोर लापरवाही के कारण प्रमोद महतो के मानवाधिकार का हनन हो रहा है। उनका कहना है कि ससमय वकालतनामा न मिलने से उनके पति को जमानत के अपने कानूनी अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जिससे उन्हें और उनके परिवार को अनावश्यक मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। इस मामले में कैदियों के अधिकार की अनदेखी एक गंभीर चिंता का विषय है।
जमानत के हकदार कैदियों को क्यों झेलनी पड़ रही अकारण परेशानी?
यह कोई एक या दो दिन का मामला नहीं है, बल्कि कई जमानतीय मामलों में कैदियों को जेल प्रशासन की इस ढिलाई का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वकालतनामा एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, जिसके बिना वकील अदालत में कैदी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते और न ही उनकी जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। समय पर इस दस्तावेज का उपलब्ध न होना, न्याय प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पीड़िता रूबी देवी ने डीएम और प्राधिकार के सचिव से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले जेल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी अन्य कैदी को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े और न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे। प्रशासन से उम्मीद है कि इस गंभीर मसले पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और उचित कदम उठाए जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





