BMC Corporator Salary: मुंबई, देश की आर्थिक राजधानी और एशिया के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के पार्षदों को मिलने वाले मानदेय और सुविधाओं को लेकर अक्सर लोगों में जिज्ञासा बनी रहती है। पार्षद, जो सीधे जनता से जुड़कर उनकी समस्याओं को उठाते हैं, आखिर कितनी सैलरी पाते हैं और उन्हें क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं, आइए इस पर विस्तार से जानते हैं।
BMC Corporator Salary: मुंबई पार्षदों की सैलरी और भत्ते: जानें पूरी जानकारी
BMC Corporator Salary: पार्षदों का मानदेय और भत्ते
मुंबई नगर निगम के पार्षदों को कोई बड़ी सैलरी नहीं दी जाती है, बल्कि उन्हें एक निर्धारित मानदेय मिलता है। जुलाई 2017 में, BMC ने पार्षदों के मानदेय में वृद्धि का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इससे पहले, पार्षदों को हर महीने 10,000 रुपये मिलते थे, लेकिन महंगाई में वृद्धि और उनके बढ़ते कार्यभार को ध्यान में रखते हुए, इस राशि को बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया। यह निर्णय वर्ष 2010 के बाद से बढ़ती महंगाई और पार्षदों की अपने क्षेत्र में लगातार दौरे, बैठकों और जनता से जुड़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए लिया गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि BMC पार्षदों को मिलने वाली यह राशि पूरी तरह से फिक्स सैलरी नहीं होती है। पार्षदों को मिलने वाला मानदेय कई बार उनके कार्यों, बैठकों में उनकी उपस्थिति और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में भागीदारी से भी जुड़ा होता है। मीटिंग में आने-जाने के भत्ते, विशेष बैठकों के लिए दिए जाने वाले भत्ते और कुछ अन्य खर्चों की भरपाई अलग से की जाती है, जिससे उनकी कुल आय बढ़ जाती है।
पार्षदों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं
पार्षदों को केवल मासिक मानदेय ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। इनमें सबसे अहम है वार्षिक विकास फंड। हर पार्षद को अपने वार्ड के विकास कार्यों के लिए एक निर्धारित राशि आवंटित की जाती है। इस फंड का उपयोग सड़क निर्माण, नाली की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट लगवाने, पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने, स्वच्छता बनाए रखने और अन्य आवश्यक सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता है। यह राशि हर वार्ड में अलग-अलग हो सकती है, जो उस वार्ड की आवश्यकताओं और भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें
इसके अतिरिक्त, पार्षदों को बैठकों में शामिल होने के लिए बैठक भत्ता भी मिलता है। नगर निगम की स्थायी समिति, आम सभा और अन्य समितियों की बैठकों में उनकी उपस्थिति पर उन्हें यह भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता भी उनकी कुल आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसके साथ ही, पार्षदों को अपने वार्ड और नगर निगम मुख्यालय के बीच आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता भी दिया जाता है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बोझ के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। वास्तव में, पार्षदों के ये भत्ते उन्हें जनता की सेवा में सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




