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फ़रवरी, 20, 2026
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Purnea University News: बनमनखी और कसबा में PG की पढ़ाई फिर शुरू करने की मांग तेज, छात्रों का भविष्य दांव पर

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Purnea University News: शिक्षा के मंदिर में ज्ञान की ज्योति कभी बुझनी नहीं चाहिए, लेकिन पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेजों में यही हो रहा है। बनमनखी और कसबा के छात्र लंबे समय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उनका भविष्य अंधकारमय न हो।

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Purnea University News: क्या है छात्रों की मुख्य मांग और इसका महत्व?

पूर्णिया विश्वविद्यालय से संबद्ध बनमनखी और कसबा के महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई फिर से शुरू करने की मांग जोर पकड़ रही है। इन क्षेत्रों के छात्र और स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि जल्द से जल्द पीजी पाठ्यक्रमों को बहाल किया जाए। उनका कहना है कि पढ़ाई बंद होने से छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और उन्हें दूसरे शहरों में जाकर महंगी पढ़ाई करनी पड़ रही है।

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स्थानीय जनप्रतिनिधियों और छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई है। उनका तर्क है कि बनमनखी और कसबा जैसे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्नातकोत्तर शिक्षा की उपलब्धता न होने से कई होनहार छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन कॉलेजों में पहले पीजी की पढ़ाई होती थी, लेकिन किसी कारणवश इसे बंद कर दिया गया। छात्रों का कहना है कि अगर पहले पढ़ाई होती थी, तो अब इसे फिर से शुरू करने में क्या परेशानी है। वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्या पर गंभीरता से विचार करे और त्वरित कार्रवाई करे।

छात्रों के भविष्य पर मंडराता संकट और समाधान की उम्मीद

पीजी की पढ़ाई बंद होने से छात्रों को न केवल अकादमिक स्तर पर नुकसान हो रहा है, बल्कि उनके करियर विकल्पों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कई छात्र जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर बेहतर रोज़गार के अवसर पाना चाहते हैं, वे अब निराश हैं। उन्हें नौकरी के लिए आवश्यक योग्यता प्राप्त करने में बाधा आ रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों की वाजिब मांगों पर ध्यान देना चाहिए। स्थानीय कॉलेज प्रबंधनों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह सिर्फ छात्रों के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के शैक्षिक विकास के लिए आवश्यक है। एक बार फिर से स्नातकोत्तर शिक्षा की सुविधा बहाल होने से न केवल वर्तमान छात्रों को लाभ होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उच्च शिक्षा के द्वार खुलेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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हम आशा करते हैं कि पूर्णिया विश्वविद्यालय जल्द ही इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे उन हज़ारों छात्रों को राहत मिलेगी जो अपने ही क्षेत्र में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने का सपना देखते हैं।

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