

Mahant Awadh Kishore Das Death: एक तपस्वी जीवन का अध्याय पूर्ण हुआ, जैसे कोई हिमालयी शिखर सदियों की साधना के बाद स्वयं में विलीन हो जाए। मिथिला मंडल के आध्यात्मिक आकाश से एक दैदीप्यमान नक्षत्र अस्त हो गया है, जिसकी रौशनी से हजारों हृदय प्रकाशित होते रहे।
Mahant Awadh Kishore Das Death: बेनीपुर। मिथिला मंडल के महामंडलेश्वर महान संत एवं धेरुख राम जानकी मंदिर के महंत श्री श्री 108 श्री अवध किशोर दास का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वे लगभग 85 वर्ष के थे। उनके जाने से धेरुख राम जानकी मंदिर की महान विरासत के साथ-साथ दस हजार से अधिक शिष्यों का विशाल अनुयायी वर्ग पीछे छूट गया है। उनके निधन की खबर फैलते ही, कड़ाके की ठंड और प्रचंड शीतलहर के बावजूद, अहले सुबह से ही मंदिर परिसर में अनुयायियों की भारी भीड़ जुटने लगी। मिथिला मंडल के कोने-कोने से संत और महंतों का आगमन भी शुरू हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। श्रद्धालुओं और अनुयायियों को इस महान संत के अंतिम दर्शन के लिए राम-जानकी मंदिर परिसर में उनके पार्थिव शरीर को रखा गया है।
महंत अवध किशोर दास की महान तपस्या और उनका विराट कर्म
उनके परम शिष्य एवं उत्तराधिकारी राम दास के अयोध्या से आगमन के पश्चात गुरुवार सुबह मंदिर परिसर में ही उनके गुरु स्व. सुखदेव दास जी महाराज के बगल में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। महंत अवध किशोर दास की तपस्या और उनके विराट कर्म का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में डेढ़ दर्जन से अधिक विराट महाविष्णु महायज्ञों का सफलतापूर्वक आयोजन किया था। वह एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
समय-समय पर सिमरिया कल्पवास मेला, अर्द्ध कुंभ और देश के चारों कुंभ स्थलों पर लगने वाली महाकुंभ में मिथिला मंडल खालसा की यश-कीर्ति में हजारों लोग शामिल होकर सहभागी बनते थे। उनके निधन की खबर से मर्माहत दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि उनके जाने से मिथिला की आध्यात्मिक चेतना के युगद्रष्टा एवं अमिट स्तंभ का अंत हो गया है। यह एक अपूरणीय क्षति है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मिथिला के जनप्रतिनिधियों ने व्यक्त किया गहरा दुख
विधायक प्रोफेसर विनय कुमार चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अवध किशोर बाबा केवल संत ही नहीं, एक महान आध्यात्मिक गुरु और चेतना के प्रतीक थे। उन्होंने समाज को सही दिशा दिखाने का काम किया। वहीं, विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार चौधरी ने कहा, “मुझे व्यक्तिगत रूप से काफी क्षति पहुंची है। मैंने करुणा एवं स्नेह के प्रतीक एक अभिभावक को खो दिया है।” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


