



Kamtaul News: Cultural Festival: कला की बानगी ऐसी कि जैसे इंद्रधनुष धरती पर उतर आया हो, जहां हर रंग अपनी कहानी कह रहा था। कमतौल में आयोजित अहल्या गौतम महोत्सव का पहला दिन सांस्कृतिक एकता और विविधता का ऐसा ही अनुपम संगम बना।
अहल्या गौतम महोत्सव: Cultural Festival ने मोहा सबका मन, कलाकारों ने बिखेरी विविध रंगों की छटा
सांस्कृतिक महोत्सव में कला की अनूठी छटा
कमतौल, बिहार: 14वें अहल्या गौतम महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम में सृष्टि फाउंडेशन के प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों का समन्वय स्थापित करते हुए उन्होंने भारत की ‘विविधता में एकता’ के चिरस्थायी भाव को मंच पर जीवंत कर दिया। यह अद्भुत प्रदर्शन, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बिहार की अपनी माटी की खुशबू लिए मिथिलांचल के प्रसिद्ध लोक नृत्य झिझिया से हुई, जिसे साक्षी कुमारी और वर्षा कुमारी ने बड़ी खूबसूरती से प्रस्तुत किया। इसके बाद ओडिसा की पारंपरिक संबलपुरी नृत्य की प्रस्तुति जयश्री जयंती और सोनाक्षी प्रिया ने दी, जिसने सबको झूमने पर मजबूर कर दिया।
भारतीय लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति
कलाकारों ने अपनी कला से भारत के हर कोने की झलक दिखाई। मध्यप्रदेश के जीवंत लोक नृत्य को श्रुति सिंह और माही गुप्ता ने पेश किया, तो राजस्थान के प्रसिद्ध घूमर नृत्य पर साक्षी कुमारी, वर्षा कुमारी और निशा सिंह ने समां बांध दिया। उत्तर प्रदेश से कृष्ण-राधा के अमर प्रेम की प्रस्तुति सत्यम झा और खुशी कुमारी ने दी, जिसने मंच पर भक्ति और प्रेम का अद्भुत वातावरण रच दिया। हरियाणा की ऊर्जावान प्रस्तुति वर्षा कुमारी और स्वयं जय प्रकाश पाठक ने की, जो दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव था।
जम्मू-कश्मीर के डोगरी नृत्य में अंतरा चौधरी ने अपने आकर्षक अंदाज से सबका ध्यान खींचा, वहीं महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लावणी नृत्य की जोशीली प्रस्तुति श्रुति सिंह और माही गुप्ता ने एक बार फिर मंच पर आग लगा दी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी कलाकारों ने एक साथ समूह नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने भारत की राष्ट्रीयता के सात रंगों को समेटा। इस अद्भुत प्रस्तुति ने सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रशासन की ओर से सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सांस्कृतिक संध्या कला और संस्कृति के प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव बन गई।



