



Ahalya Gautam Mahotsav: कड़ाके की ठंड में जब अंगुलियां जेब से निकलने से कतरा रही थीं, तब कमतौल के अहल्यास्थान में सुरों और एक शानदार गजल प्रस्तुति की गर्माहट ने दिलों में अलख जगा दी। यह केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और अध्यात्म का संगम है, जिसने पूरे वातावरण को अपनी आगोश में ले लिया।
Ahalya Gautam Mahotsav: कमतौल में गजलों की रूहानी गर्माहट, कुमार सत्यम ने बांधा समां
Ahalya Gautam Mahotsav में सुरों और इश्क की दास्तान
कमतौल स्थित तीर्थ स्थल अहल्यास्थान में चल रहे 14वें राजकीय अहल्या गौतम महोत्सव के दूसरे दिन देर रात तक भजनों ने भक्ति रस घोला तो गजलों ने इश्क और मुश्क की बानगी पेश की। सर्द मौसम में भी श्रोताओं की वाहवाही और तालियों ने रूहानी गजलों की गर्माहट को महसूस कराया।
महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध गजल गायक कुमार सत्यम ने अपनी खनकती आवाज का जादू बिखेरा तो कड़ाके की ठंड में भी श्रोताओं के हाथ अनायास ही जेबों से निकलकर तालियां बजाने को विवश हो गए।
कुमार सत्यम ने अपनी सदाबहार गजल ‘खामोश लव है झुकी है पलकें, दिलों में उल्फत नई नई है’ की प्रस्तुति से उन नए सफल हुए लोगों के लहजे पर तंज कसा, जो अपनी जड़ों को भूल जाते हैं। उन्होंने इस गजल के माध्यम से खानदानी रईस और नई दौलत के बीच के सूक्ष्म अंतर को बखूबी दर्शाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
समय की गति और जीवन की सच्चाई पर आधारित गजल ‘वक्त का ये परिंदा रूका है कहां’ समेत कई लोकप्रिय और भावनात्मक गजलें गाकर उन्होंने महोत्सव की गरिमा को बढ़ाया। नुसरत फतेह अली खान की प्रसिद्ध कव्वाली ‘मेरे रश्के कमर’ को जब कुमार सत्यम ने अपने अनोखे अंदाज में पेश किया, तो दर्शक झूम उठे और देर तक चले इस कार्यक्रम में उन्हें सुनने वालों की कोई कमी नहीं थी।
इससे पहले, उर्वशी प्रियदर्शी ने अपनी मैथिली और हिंदी फिल्मी गीतों की मधुर प्रस्तुतियों से समां बांध रखा था। उनके लोकप्रिय गीत ‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में’ पर दर्शक लगातार झूमते रहे।
बदल रहा है संगीत का मिजाज: कुमार सत्यम
अहल्यास्थान स्थित अतिथि गृह में एक संक्षिप्त बातचीत के दौरान, प्रसिद्ध गजल गायक कुमार सत्यम ने कड़ाके की ठंड में अहल्यास्थान आने के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि संगीत का चलन बदल रहा है और लोग अब अच्छी और अर्थपूर्ण चीजों को सुनना पसंद कर रहे हैं। गजलों को आसान भाषाओं में पेश करने से दर्शक उन्हें बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं, जिससे इस गजल प्रस्तुति के प्रति श्रोताओं का रुझान बढ़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उन्होंने बिहार की अत्यधिक ठंड का जिक्र करते हुए मुंबई और यहां के तापमान के अंतर को बताया। सत्यम ने कहा कि अलग-अलग इलाकों के श्रोता भी भिन्न-भिन्न होते हैं, हालांकि बिहार में भी संगीत का माहौल बदल रहा है और शिक्षा का स्तर भी सुनने की प्रवृत्ति को प्रभावित करता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उनकी गजलों की आसान भाषा ही श्रोताओं की बढ़ती संख्या का प्रमुख कारण है।
कुमार सत्यम ने कहा कि उन्हें सभी जगहों से अपार प्यार और दुलार मिल रहा है। वे भविष्य को लेकर भी कई नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने महोत्सव में आमंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और न्यास समिति का हृदय से आभार व्यक्त किया।



