



Ahilya Gautam Mahotsav News: जीवन की आपाधापी में सुकून के कुछ पल, जब सुरों की सरगम और भक्ति की बयार एक साथ बहती है, तब अहल्या की धरती पर उत्सव का रंग गहराता है। मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को संजोए 14वें राजकीय अहल्या गौतम महोत्सव का तीसरा और अंतिम दिन रविवार को भक्ति और संगीत से सराबोर रहेगा।
अहल्या स्थान में चल रहे 14वें राजकीय अहल्या गौतम महोत्सव का समापन सत्र रविवार को भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव का उद्घाटन भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह नगर विधायक संजय सरावगी सहित कई विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया जाएगा, जो इसकी गरिमा को और बढ़ाएगा। यह महोत्सव मिथिला की गौरवशाली परंपरा और कला को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
अहल्या गौतम महोत्सव न्यूज़: विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
महोत्सव का अंतिम दिन दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर देगा। दिन के चार बजे से शुरू होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में बजरंग म्यूजिकल के कलाकार अपनी अद्भुत प्रस्तुतियां देंगे, जो श्रोताओं को भावविभोर कर देगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन प्रस्तुतियों में भक्ति और लोक कला का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।
रात गहराने के साथ ही संगीत का जादू और भी बढ़ जाएगा। प्रख्यात गायक माधव राय और जॉली मुखर्जी की मनमोहक प्रस्तुतियों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहेंगे। उनकी आवाज में मैथिली, हिंदी और भोजपुरी के गीत जहाँ हृदय को छू जाएंगे, वहीं रूहानी गजलें सर्द रात में गर्माहट का एहसास कराएंगी। यह सचमुच एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।
महोत्सव का उद्देश्य मिथिला की कला, संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देना है। हर साल यह आयोजन बड़ी संख्या में कलाकारों और कला प्रेमियों को एक साथ लाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
संगीत और गजलों से सजेगी अंतिम निशा
इस तीन दिवसीय आयोजन में विभिन्न विधाओं के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। अहल्या गौतम महोत्सव न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का भी एक जरिया है। आयोजकों ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि महोत्सव में आने वाले हर व्यक्ति को एक अनूठा अनुभव मिले। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
समापन समारोह के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं ताकि यह महोत्सव एक यादगार छाप छोड़ सके। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि दर्शक बिना किसी बाधा के कार्यक्रमों का आनंद ले सकें। इस महोत्सव के माध्यम से स्थानीय कला और कलाकारों को एक राष्ट्रीय मंच प्राप्त होता है, जो उनके प्रोत्साहन के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह हमारी समृद्ध परंपराओं का जीवंत उत्सव है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



