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मार्च, 18, 2026
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Bhagalpur Land Dispute: दशकों पुराने विवाद में आशा देवी की जीत, बुलडोजर के साए में दुकानें खाली

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Bhagalpur Land Dispute: ज़मीन का हर टुकड़ा अपनी एक कहानी कहता है, और भागलपुर में एक ऐसी ही कहानी 27 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंचती दिख रही है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निवासी आशा देवी के बीच दशकों से चला आ रहा भूमि विवाद अब निर्णायक मोड़ पर आ गया है। कोर्ट के कड़े आदेश के बाद महात्मा गांधी रोड स्थित सिविल सर्जन कंपाउंड की दर्जनों दुकानों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई।

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प्रशासनिक अमले के साथ दो बुलडोजर जब मौके पर पहुंचे, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। हालाँकि, अभी बुलडोजर चलाए नहीं गए हैं, लेकिन इसकी मौजूदगी ही पर्याप्त थी। न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की जानकारी मिलते ही दुकानदारों ने संभावित कानूनी शिकंजे से बचने के लिए अपनी दुकानों को स्वयं खाली करना शुरू कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मौके पर कोर्ट के नाजिर, अधिवक्ता और संबंधित दंडाधिकारी मौजूद थे, जो इस पूरी प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी कर रहे थे।

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Bhagalpur Land Dispute: क्या है इस 27 साल पुराने विवाद की कहानी?

यह बहुप्रतीक्षित Bhagalpur Land Dispute वर्ष 1998 से अदालती गलियारों में घूम रहा था। आशा देवी ने निचली अदालत में 2011 में ही मुकदमा जीत लिया था, और वर्ष 2024 में अपील के दौरान भी फैसला उनके पक्ष में बरकरार रहा। इसी के बाद, न्यायालय ने स्पष्ट रूप से अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया, जिसके अनुपालन में बुधवार को प्रशासन ने अपनी कार्रवाई शुरू की।

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इस पूरे विवाद की जड़ें 1985 के एक सर्वेक्षण से जुड़ी हुई हैं। उस वक्त सरकारी अमीन बैजनाथ गुप्ता द्वारा किए गए सर्वे में सिविल सर्जन कंपाउंड के एक हिस्से को आशा देवी के नाम पर दर्ज कर दिया गया था। जबकि, आधिकारिक खतियान के अनुसार, यह भूमि सरकारी संपत्ति है। इस बड़ी सर्वे त्रुटि के सामने आने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने संबंधित सरकारी अमीन को सेवा से बर्खास्त भी कर दिया था। इसके बाद 1998 में यह मामला न्यायालय पहुंचा, और तब से अब तक सुनवाई जारी थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

हाईकोर्ट में विचाराधीन, फिर भी खाली हो रही दुकानें

निचली अदालतों में सरकारी पक्ष की अपील लगातार खारिज होती रही। यह मामला उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में भी सुनवाई के लिए स्वीकार किया गया है, लेकिन अब तक वहां से किसी भी तरह का स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त नहीं हुआ है। फिलहाल, भागलपुर कोर्ट के सब जज-2 और सीजेएम की अदालत के आदेशों के आधार पर ही यह अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इस संदर्भ में, सिविल सर्जन के कानूनी सलाहकार अब्दुल रब्बानी ने बताया कि यह मामला अभी भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें वहां से कोई नया आदेश नहीं मिला है। ऐसे में, वे निचली अदालत के निर्देशों का ही पालन कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन प्रशासन इस मामले में आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और क्या यह लंबी कानूनी लड़ाई यहीं खत्म होगी या इसका एक और अध्याय शुरू होगा।

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