
Bhagalpur Land Dispute: बरसों से धूल फांक रही फाइलों पर जब कानून का बुलडोजर चला, तो न सिर्फ इमारतें गिरीं, बल्कि उम्मीदों के मलबे से एक नई कहानी भी निकली।
भागलपुर लैंड डिस्प्यूट: सिविल सर्जन कंपाउंड में चला पीला पंजा, 27 साल बाद पांच दुकानें ध्वस्त, कार्रवाई 15 दिनों के लिए रुकी
भागलपुर लैंड डिस्प्यूट: महात्मा गांधी रोड स्थित सिविल सर्जन कम्पाउंड में 27 साल से अदालतों के गलियारों में भटक रहा भूमि विवाद आखिरकार जमीन पर आ पहुँचा। प्रशासन का पीला पंजा गरजा और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। न्यायालय के आदेश पर एक साथ दो बुलडोजर चले और देखते ही देखते पांच दुकानों को जमींदोज कर दिया गया।
जैसे ही पीला पंजा चला, दुकानदारों में अफरा-तफरी मच गई। कोई शटर गिराता दिखा तो कोई आनन-फानन में अपना सामान समेटता नजर आया। चारों तरफ बेचैनी का माहौल था। कार्रवाई के दौरान कोर्ट के नाजिर, अधिवक्ता और दंडाधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करते रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, कुछ ही देर बाद सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और एक बड़ा फैसला लेते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को फिलहाल 15 दिनों के लिए रोक दिया।
सदर एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि प्रशासन को सूचना मिली थी कि कार्रवाई जारी रखने से विधि-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह अस्थायी रोक लगाई गई है। उन्होंने साफ किया कि आगे न्यायालय से जो भी आदेश आएगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
भागलपुर लैंड डिस्प्यूट: आखिर क्या है 27 साल पुराना यह विवाद?
यह विवाद वर्ष 1998 से न्यायालय में चल रहा था। स्थानीय महिला आशा देवी ने वर्ष 2011 में निचली अदालत से केस जीता था और 2024 में अपील में भी उनके पक्ष में ही फैसला आया। इसी न्यायालय का आदेश था जिसके बाद कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया और इस पर अमल करते हुए यह कार्रवाई शुरू की गई। इस पूरे मामले की कहानी वर्ष 1985 के सर्वे से जुड़ी है, जब सरकारी अमीन बैजनाथ गुप्ता द्वारा किए गए सर्वे में सिविल सर्जन कम्पाउंड के एक हिस्से को आशा देवी के नाम से दर्ज कर दिया गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जबकि जमीन का खतियान सरकारी बताया जाता है।
सर्वे की गलती और न्यायालयी लड़ाई
इस गड़बड़ी के उजागर होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने सरकारी अमीन को बर्खास्त भी किया था। इसके बाद 1998 में यह मामला कोर्ट पहुँचा। सरकारी अपील निचली अदालतों में खारिज होती रही। मामला हाईकोर्ट में भी पहुँचा, लेकिन अब तक कोई स्टे नहीं मिला है। सिविल सर्जन के लीगल एडवाइजर अब्दुल रब्बानी के अनुसार, मामला फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है और वहां से कोई नया आदेश नहीं आया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अब सवाल यह है कि 15 दिन बाद न्यायालय क्या रुख अपनाता है और सिविल सर्जन कम्पाउंड में अतिक्रमण पर पीला पंजा दोबारा चलेगा या नहीं। भागलपुर की नजरें अब अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


