



Ahilya Gautam Mahotsav: कमताौल में भक्ति और संस्कृति का ऐसा संगम दिखा, जहां सुरों की सरगम और मंत्रों की गूंज ने रात को दिव्य बना दिया। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत अहसास था।
कमतौल में अहल्या गौतम महोत्सव: जहाँ भक्ति और लोक-कला का अद्भुत संगम हुआ
अहल्या गौतम महोत्सव: तीसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या
Ahilya Gautam Mahotsav: 14वें राजकीय अहल्या गौतम महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आध्यात्मिक अनुष्ठानों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। समापन सत्र का विधिवत उद्घाटन एडीएम सलीम अख्तर, एडीएम मनोज कुमार, डीएम के एनडीसी पवन कुमार, एसडीसी वृषभानु के साथ न्यास के अध्यक्ष बालेश्वर ठाकुर, उपाध्यक्ष विमल यादव, सदस्य उमेश ठाकुर और सीओ वतसंक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।
प्रसिद्ध गायिका रचना झा ने अपनी मखमली आवाज में मिथिला के सौंदर्य को दर्शाने वाले गीत गाए। उन्होंने ‘गुमान छै यो हमरा हम छि मिथिला के’ और ‘एक बेर बोलियौ सीताराम जनकपुर में’ जैसे आध्यात्मिक रस से सराबोर गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्ति और प्रेम से भर दिया, जिससे कड़ाके की ठंड में भी लोगों को गर्माहट का एहसास हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
### अहल्या आरती की भव्यता ने मोहा मन
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के इसी क्रम में, काशी के अभिनंदन शर्मा के नेतृत्व में विद्वान पंडितों द्वारा भव्य अहल्या आरती का आयोजन किया गया। देश की सनातन संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह आरती अपनी भव्यता, मनमोहक दृश्यों, मंत्रमुग्ध कर देने वाले संगीत और गहरी आध्यात्मिक अनुभूति के लिए अविस्मरणीय रही। जब दीपों की रोशनी, घण्टियों की गूंज और वैदिक मंत्रों से वातावरण दिव्य और ऊर्जावान हो उठा, तो श्रद्धालु आस्था में लीन हो गए। इस महोत्सव के मंच से अहल्या आरती की दिव्य प्रस्तुति आस्थावानों के आकर्षण का केंद्र रही।
उसके बाद, लोकगायक माधव राय ने अपने गीतों से समां बांधा। ‘सबसे पावन अपन मिथिलाधाम यो भैया’ जैसे गीतों से उन्होंने मिथिला संस्कृति की सुंदर झांकी प्रस्तुत की, जिसने श्रोताओं को अपनी जड़ों से जोड़ा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। माधव राय और रचना झा ने मिलकर ‘हे सजनी जँ हमरा सँ प्रेम करै छी’ और ‘सुन दीवाना रे दीवानी कहैय जमाना’ जैसे युगल गीतों की प्रस्तुति दी, जिसने सर्द रात में भी श्रोताओं को प्रेम और संगीत की गर्माहट का एहसास कराया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
### समापन सत्र की गरिमा और आगामी प्रस्तुति
अंतिम दिन के कार्यक्रम में श्रोताओं ने अपनी उपस्थिति से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। यह सांस्कृतिक संध्या न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि इसने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोककलाओं को भी प्रदर्शित किया। इस महोत्सव के जरिए क्षेत्र की कला और कलाकारों को एक महत्वपूर्ण मंच मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद, मशहूर गायक जॉली मुखर्जी का कार्यक्रम होगा, जिसका बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।



