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मार्च, 6, 2026
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लोहड़ी विशेज: अग्नि की परिक्रमा से जीवन में भरें खुशियां

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Lohri Wishes: प्रकृति के अद्भुत चक्र और नवजीवन के प्रतीक, लोहड़ी का पावन पर्व देशभर में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। यह शीत ऋतु की विदाई और फसलों के आगमन का संदेश लेकर आता है, जब अग्नि की पवित्र लपटें अंधकार को चीरकर प्रकाश और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती हैं। यह विशेष पर्व हमें एकता, प्रेम और कृतज्ञता का पाठ पढ़ाता है।

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लोहड़ी विशेज: अग्नि की परिक्रमा से जीवन में भरें खुशियां

लोहड़ी विशेज: पावन अग्नि और परंपराओं का महत्व

यह त्योहार विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसकी मधुर गूंज पूरे भारत में सुनाई देती है। लोहड़ी पर्व मुख्य रूप से शीतकालीन संक्रांति के समय मनाया जाता है, जो किसानों के लिए नई फसल की खुशी का प्रतीक है। इस दिन घर-घर में विशेष तैयारियां की जाती हैं, और संध्याकाल में लकड़ियों और उपलों का ढेर लगाकर उसमें अग्नि प्रज्वलित की जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अग्नि में तिल, गुड़, मक्का, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित करने की परंपरा है, जिसे ‘अग्नि पूजा’ के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि अग्नि में ये सामग्रियां अर्पित करने से देवताओं तक हमारी प्रार्थनाएं पहुंचती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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परंपराएं और महत्व

लोहड़ी का पर्व केवल अग्नि जलाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक पकवानों का भी संगम है। इस दिन परिवार और मित्र एक साथ मिलकर अग्नि के चारों ओर घूमते हैं, भंगड़ा और गिद्दा जैसे लोकनृत्य करते हैं, और ढोल-नगाड़ों की थाप पर खुशियां मनाते हैं। गजक, रेवड़ी, मूंगफली, तिल के लड्डू और सरसों का साग व मक्के की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजन इस पर्व की मिठास को और बढ़ा देते हैं। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आने वाले दिनों के लिए नई ऊर्जा और आशा का संचार करने का अवसर देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  चैत्र मास 2026: हिन्दू नववर्ष का पावन आरंभ और आध्यात्मिक पर्व

लोहड़ी पर्व मनाने की विधि

  • लकड़ियों और उपलों को एकत्रित कर खुले स्थान पर अग्नि के लिए ढेर तैयार करें।
  • शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करें।
  • अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हुए तिल, गुड़, मूंगफली, मक्का और रेवड़ी की आहुति दें।
  • दुल्ला भट्टी की लोककथा का श्रवण करें, जो इस पर्व से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
  • परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ पारंपरिक गीत गाएं और नृत्य करें।
  • एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं दें और खुशियां बांटें।
यह भी पढ़ें:  चैत्र मास के प्रमुख पर्व और Chaitra Month Festivals: नववर्ष का आध्यात्मिक आरंभ

निष्कर्ष एवं उपाय

लोहड़ी का यह पावन पर्व हमें जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश देता है। यह सिखाता है कि जिस प्रकार अग्नि हर वस्तु को पवित्र कर देती है, उसी प्रकार हमें भी अपने मन से द्वेष और नकारात्मकता को त्यागकर प्रेम और सौहार्द को अपनाना चाहिए। यह पर्व नई शुरुआत और उज्जवल भविष्य की कामना का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अग्नि की यह लपटें आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं।

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