
Lohri 2026: आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण लोहड़ी का पावन पर्व, जो नई फसल के आगमन और शीत ऋतु के समापन का प्रतीक है, आज 13 जनवरी 2026 को पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। यह अग्नि और सूर्य देव की उपासना का महापर्व है, जिसमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
लोहड़ी 2026: सूर्य देव के 108 नाम और पावन अग्नि में आहुति का महत्व
लोहड़ी का पर्व मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता पूरे देश में व्याप्त है। इस दिन लोग एकत्रित होकर लोहड़ी जलाते हैं, उसमें तिल, मूंगफली, गजक और मक्के का प्रसाद अर्पित करते हैं। यह अग्नि देव को धन्यवाद देने और नई फसल के लिए आशीर्वाद मांगने का एक प्राचीन तरीका है। सूर्य देव समस्त संसार के पालक और ऊर्जा के स्रोत हैं, जिनकी उपासना से जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस शुभ अवसर पर सूर्य देव के 108 नामों का जाप और पावन अग्नि में आहुति देने का विशेष विधान है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शुभता का वास होता है।
लोहड़ी 2026 पर सूर्य देव की विशेष पूजा विधि
लोहड़ी की पावन अग्नि में आहुति देने और सूर्य देव की पूजा करने का विधि-विधान अत्यंत सरल और फलदायी है। यहाँ जानिए संपूर्ण विधि:
- लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित करने के बाद, सर्वप्रथम अग्नि देव को प्रणाम करें।
- अब पवित्र अग्नि में तिल, मूंगफली, मक्का, रेवड़ी और गजक की 11 आहुति दें। प्रत्येक आहुति देते समय “ॐ अग्नि देवाय नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
- आहुति देने के उपरांत, सूर्य देव का ध्यान करें। एक पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल, अक्षत और थोड़ी रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद, शांत चित्त से बैठकर सूर्य देव के 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। यह जाप आपके जीवन में आरोग्य, धन और मान-सम्मान में वृद्धि करेगा।
- पूजा के अंत में, सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि, निरोगी काया और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
लोहड़ी की इस पावन वेला पर सूर्य देव की उपासना से समस्त कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सहिष्णुता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
ॐ मित्राय नमः। ॐ रवये नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ भानवे नमः। ॐ खगाय नमः। ॐ पूष्णे नमः। ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। ॐ मरीचये नमः। ॐ आदित्याय नमः। ॐ सवित्रे नमः। ॐ अर्काय नमः। ॐ भास्कराय नमः॥
यह मंत्र सूर्य देव के प्रमुख नामों में से एक है, जिसका जाप करते हुए उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है। लोहड़ी की इस पवित्र अग्नि और सूर्य देव की आराधना से आपके जीवन में अपार सुख और शांति आएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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लोहड़ी पर्व का आध्यात्मिक महत्व और उपाय
लोहड़ी का पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं है, बल्कि यह नव ऊर्जा और आशा का प्रतीक भी है। इस दिन की गई सूर्य पूजा और अग्नि उपासना से घर-परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। यदि आप किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं, तो लोहड़ी की रात्रि में अग्नि में गुड़ और तिल का दान करें। इससे दरिद्रता दूर होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है। यह पर्व हमें सामूहिक उत्सवों के माध्यम से समाज में एकता बनाए रखने का संदेश देता है।





