Jamui News: सियासत की बिसात पर कोई मौका नहीं चूकता, खासकर जब बात मतदाताओं को साधने की हो। जमुई में मकर संक्रांति के बहाने कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसकी शुरुआत तो सौहार्दपूर्ण रही, लेकिन अंत विवादों में घिर गया। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के जीजा और जमुई सांसद अरुण भारती द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज अपेक्षा से अधिक भीड़ और अव्यवस्था के कारण चर्चा का विषय बन गया।
Jamui News: सियासी दावपेंच और जन सैलाब
यह अवसर था मकर संक्रांति के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का, जिसकी मेजबानी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जमुई सांसद अरुण भारती ने की थी। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर लोग जुटने शुरू हो गए थे। शुरुआत में सब कुछ व्यवस्थित लग रहा था, भोजन वितरण भी सुचारु रूप से चल रहा था। लेकिन कुछ ही देर में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। भोज में उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे भोजन वितरण व्यवस्था चरमरा गई। धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल बन गया, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई लोग बिना भोजन लिए ही लौट गए, वहीं कुछ जगहों पर लोगों के बीच हल्की-फुल्की गरमागरमी भी देखी गई।
इस अव्यवस्था ने पूरे आयोजन की रौनक फीकी कर दी और सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। जानकार इसे आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अरुण भारती की मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कवायद के रूप में देख रहे थे, लेकिन शायद योजना में भीड़ प्रबंधन की कमी रह गई। इस तरह के आयोजनों से नेताओं की लोकप्रियता का अंदाजा भी लगता है, लेकिन जब प्रबंधन ठीक न हो तो यह भारी भी पड़ सकता है।
यह आयोजन लोकसभा चुनाव से पहले Jamui News के गलियारों में राजनीतिक तापमान बढ़ाने वाला था। चिराग पासवान के जीजा अरुण भारती ने अपने संसदीय क्षेत्र में एक बड़े समूह को एक साथ लाने का प्रयास किया था, लेकिन अंततः यह घटना अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
व्यवस्था पर उठे सवाल, विपक्ष को मिला मौका
स्थानीय लोगों का कहना था कि प्रशासन को ऐसे बड़े आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं, पार्टी कार्यकर्ताओं ने भीड़ की अधिकता को उत्साह का प्रतीक बताया, लेकिन अंदरखाने वे भी मानते हैं कि स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इस पूरे प्रकरण ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि आयोजन समिति की व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इस घटना को भुनाने में देर नहीं लगाई और इसे “प्रशासनिक विफलता” और “जनता की उपेक्षा” करार दिया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में इस घटना का सियासी असर क्या होगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। क्या यह सांसद की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा, या फिर लोग इसे एक छोटी घटना मानकर भूल जाएंगे? आने वाले समय में चुनावी गणित के लिहाज से यह घटना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

