
Shattila Ekadashi: माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने तथा कथा श्रवण करने से व्यक्ति के सभी पापों का शमन होता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। षटतिला एकादशी का व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है। इस पावन कथा के श्रवण से व्रत का पूर्ण फल मिलता है, पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में एकादशी व्रत महात्म्य का विशेष वर्णन मिलता है, जो दर्शाता है कि इस दिन के पालन से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
षटतिला एकादशी: व्रत कथा और इसका दिव्य महात्म्य
षटतिला एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा का पावन पर्व
यह कथा बहुत प्राचीन काल की है। एक समय नारद मुनि ने भगवान विष्णु से षटतिला एकादशी के महत्व और उसकी कथा के बारे में पूछा। भगवान विष्णु ने नारद जी को बताया कि एक समय मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी निवास करती थी, जो मेरी परम भक्त थी। वह सदैव मेरा पूजन करती थी और सभी एकादशी के व्रत रखती थी। वह इतनी पवित्र थी कि अपना संपूर्ण जीवन धर्म-कर्म में व्यतीत करती थी। परंतु एक बार उसने कभी किसी को अन्नदान नहीं किया था, जिससे उसे अन्नदान के पुण्य से वंचित रहना पड़ा। एक दिन जब उसने षटतिला एकादशी का व्रत रखा, तब उसके शरीर त्यागने के उपरांत जब वह मेरे धाम में आई, तो उसे एक खाली कुटिया मिली। उसने मुझसे पूछा, “हे प्रभु! मैंने तो आजीवन आपकी सेवा की, आपकी पूजा की, फिर मुझे यह खाली कुटिया क्यों मिली?”
तब भगवान विष्णु ने उसे बताया, “हे देवी! तुमने मेरे सारे व्रत किए, मेरी भक्ति की, परंतु तुमने कभी किसी को अन्नदान नहीं किया। इसलिए यह कुटिया तुम्हें अन्नदान के पुण्य के अभाव में मिली है।” भगवान ने उसे आगे बताया, “अब तुम अपनी कुटिया में जाओ और जब देव स्त्रियां तुम्हें देखने आएं, तब तुम उनसे षटतिला एकादशी के व्रत का महत्व और विधि पूछना। जब वे तुम्हें यह बताएं, तब तुम कुटिया का द्वार खोलना।” ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया। जब देव स्त्रियां उसे देखने आईं, तो उसने उनसे षटतिला एकादशी व्रत की विधि पूछी। देव स्त्रियों ने उसे व्रत की विधि बताई और उसके बाद ब्राह्मणी ने कुटिया का द्वार खोला।
इस व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया धन-धान्य से भर गई और उसे वैकुण्ठ में स्थान प्राप्त हुआ। यह कथा का सार एकादशी व्रत महात्म्य को उजागर करता है, जहाँ केवल उपवास ही नहीं बल्कि दान-पुण्य का भी अत्यधिक महत्व है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
षटतिला एकादशी का महत्व और उपाय
षटतिला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने का एक अनुपम अवसर है। इस दिन तिल का दान, तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का तर्पण और तिल का भोजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन छह प्रकार से तिल का उपयोग करने के कारण ही इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस पावन दिवस पर भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक आराधना करें और दान-पुण्य के कार्यों में संलग्न हों ताकि जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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